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Mangala Gauri Vrat 2022 | मंगला गौरी व्रत 2022 क्या है,विधि,महत्व,कथा,लाभ,

Mangala Gauri Vrat
October 13, 2022

मंगला गौरी व्रत 2022 – Mangala Gauri Vrat 2022

Mangala Gauri Vrat – इस साल 2022 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत19 जुलाई यानि मंगलवार को रखा जायेगा। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मंगला गौरी व्रत रखने से भक्तो की कई मनोइच्छाएँ पूर्ण होती है। भगवान श्री शिव और माता पार्वती की भक्ति और पूजा करने के लिए वैसे तो सभी दिन और माह महत्वपूर्ण है परन्तु सावन के महीने का का कुछ ज्यादा ही विशेष महत्व होता है।Mangala gouri vrat – सावन का महीने में पूर्ण रूप से भगवान शिव की भक्ति करने के लिए ही समर्पित है। सावन के महीने में पड़ने वाले मंगलवार का भी कुछ विशेष महत्व है। हमारे हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को किया जाता है। माना जाता है कि माता पार्वती जी ने भगवान श्री शिव को पाने के लिए अनेको व्रत रखे थे। उन्हीं में से एक व्रत ये भी है जिसे हम मंगला गौरी व्रत के नाम से जानते है । विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करके इस व्रत का पालन करती  हैं। इस साल 2022 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 19 जुलाई मंगलवार को रखा जाएगा। 

क्या है मंगला गौरी का व्रत – Kya Hai Mangala Gauri Vrat

Mangala Gauri Vrat – यह मंगला गौरी व्रत माता पार्वती जी की पूजा-अर्चना करने के लिए पूर्ण रूप से समर्पित है।यदि कोई (महिला /पुरुष) संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हुए इस व्रत को रखता है तो उसकी संतान प्राप्ति की मनोकामना जल्द ही पूरी हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस मंगला गौरी व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। साथ ही यदि किसी के भी दांपत्य जीवन में कुछ भी समस्या चल रही है। तो उनके लिए भी यह व्रत बहुत मंगलकारी और लाभदायक रहता है। यदि कोई भी अविवाहित लड़की इस व्रत को करती है तो उन्हें उत्तम और सुयोग्य वर (पति) के प्राप्ति की मनोकामना भी इस मंगला गौरी व्रत के प्रभाव से जल्द ही पूरी हो जाती है।

मंगला गौरी का व्रत करने की विधि – Mangala Gauri Vrat Karne Ki Vidhi

  •  मंगलवार के दिन प्रातः काल जल्दी उठें और स्नान आदि से निवृत होने के बाद व्रत/उपवास का संकल्प लें।
  •  संकल्प लेने के बाद अपने घर के मंदिर की अच्छे से साफ-सफाई कर लें और मां पार्वती जी और भगवान श्री शिव की प्रतिमा को स्थापित करें। ऐसा करने के बाद मां पार्वती को लाल रंग के चुनरी या लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें।
  • माँ पार्वती जी को चुनरी अर्पण करने के बाद आटे का दीपक बनायें और फिर दिया जलाएं। इसके साथ ही माँ पार्वती जी की पूजा-अर्चना पूर्ण विधि विधान से करें। 
  • सभी प्रकार की पूजन सामग्री जैसे पान,सुपारी,लौंग,इलायची,फल,पान,लड्डू सुहाग की सभी सामग्री और चूड़ियां रखें।  इसके अतिरिक्त पांच प्रकार के मेवे और सात प्रकार का अन्न भी पूजन सामग्री के साथ रख लें।
  •  इसके बाद प्रसन्नचित मुद्रा में मंगला गौरी व्रत की कथा को सुनें। पूजा पूर्ण होने के बाद परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद खिलाएं और जरूरतमंद लोगों को या निर्धन व्यक्तियों को धन अनाज आदि का दान करें।

पूजा में रखे इन बातो का ध्यान – Puja Me Rakhe In Baton Ka Dhyan

  • जब भी आप लगातार पांच  वर्षो तक इस मंगला गौरी का व्रत करलें तो पूजन करने के बाद पांचवें वर्ष में सावन महीने के अंतिम (आखरी) मंगलवार के दीन इस मंगला गौरी व्रत का उद्यापन अवश्य कर दें। क्योकि उद्यापन किये बिना ये मंगला गौरी व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।
  • इस बात का भी जरूर ख्याल रखें की मां मंगला गौरी व्रत को करने के दौरान माता को 16 महिलाएं, आटे के बने लड्डू,फल पान,सुपारी,लौंग,इलायची, और सुहाग सामग्री चढ़ाएं 

मंगला गौरी व्रत का महत्व – Mangala Gauri Vrat Ka Mahatva 

Mangala Gauri Vrat – धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगला गौरी व्रत करने तथा इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से भक्तो की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती  है। वहीं इस मंगला गौरी व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु,निरोगी और सुखी वैवाहिक जीवन जीने के लिए भी करती हैं। इसके अलावा वे महिलाएं जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखती है। उनके लिए भी ये मंगला गौरी व्रत बहुत ही उत्तम है। इस व्रत को करने से दाम्पत्य जीवन में कोई भी समस्या नहीं आती है। 

मंगला गौरी व्रत की कथा – Mangala Gauri Vrat Ki Katha 

Mangala Gauri Vrat – पौराणिक कथा की मान्यताओ के अनुसार एक समय की बात है एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी था। उसकी पत्नी बेहद खूबसूरत थी और उसके पास धन संपत्ति वैभव की कोई भी कमी नहीं थी लेकिन संतान प्राप्ति  नहीं होने की वजह से वे दोनों पति पत्नी बहुत दु:खी रहते थे। कुछ ही समय के बाद ईश्वर की कृपा से उनको पुत्र प्राप्ति हुई परंतु वह अल्पायु (कम उम्र का) था। उसे श्राप दिया गया था कि वो 16 वर्ष की आयु में सर्प दंश से ही उसकी मृत्यु निश्चित ही हो जाएगी।

Mangala Gauri Vrat – संयोग से उसका विवाह 16 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले ही हो गया। जिस सौभाग्यवान से कन्या से उसका विवाह हुआ था उस कन्या की माता मंगला गौरी व्रत नित्य किया करती थी।मां गौरी के इस व्रत की असीम महिमा के प्रभाव से उस महिला की कन्या को माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त था कि वह कभी विधवा नहीं हो सकती है।

Mangala Gauri Vrat – ऐसा माना जाता है कि अपनी माता के इसी व्रत के प्रभाव से धरमपाल की पुत्र वधु को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई थी और उसके पति को 100 वर्ष की लंबी व निरोगी आयु प्राप्त हुई थी । तभी से सुहागन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और निरोगी रहने के लिए मंगला गौरी व्रत करती हैं।

मंगला गौरी व्रत के लाभ – Mangala Gauri Vrat Ke Labh 

  • सभी महिलाये इस मंगला व्रत को ख़ुशी ख़ुशी करती है। 
  • विवाहित महिलाएं इस मंगला गौरी व्रत को अपने पति की लम्बी और निरोगी जीवन की प्राप्ति के लिए करती है। 
  • कुवांरी लड़किया इस मंगला गौरी व्रत को सुयोग्य और सुन्दर वर (पति) की प्राप्ति के लिए करती है।  
  • इस मंगला गौरी व्रत को करने से पति पत्नी के बीच किसी भी प्रकार के लड़ाई झगडे नहीं होते है 
  • इस मंगला गौरी व्रत को करने से उम्र भर केलिए दाम्पत्य जीवन सुखी और समृद्ध रहता है। 
  • इसी प्रकार के बहुत से लाभ इस मंगला गौरी व्रत के करने से होते है। 

 

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