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हरिद्वार कुम्भ मेला 2021। Haridwar Kumbh Mela 2021। जानिए कुम्भ मेले का महत्व और विशेषताएं –

हरिद्वार कुम्भ मेला 2021 - Astroupdate.com
January 23, 2021

कुम्भ एक मेला नहीं हिन्दू धर्म का एक पावन पर्व मना जाता है। इस महा कुम्भ मेले में अनगिनत श्रद्धालु प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में आस्था की डुबकी लगाते है । इन सभी पावन स्तनों पर पर प्रति 12 वर्ष और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता ह। इस वर्ष 2021 में कुंभ का आयोजन हरिद्वार में होने जा रहा है।

अगर हम हिन्दू धर्म और खगोल गणनाओं के अनुसार देंखे तो यह कुम्भ का मेला मकर संक्रांति (14 जनवरी ) के दिन शुरू होता है। जब वृहस्पति, मेष राशि में प्रवेश करते हैं और चंदमा और सूर्ये , वृश्चिक राशि में प्रवेश करते है तो ये योग बनता है । मकर संक्रांति पर होने वाले इस महान योग को कुम्भ स्नान-योग कहा जाता हैं जो अपने आप में बहुत महत्व रखता है। ये मेला बहुत शुभ और स्वर्ग के मार्ग को पाने वाला मंगलकारी मेला मना जाता है अगर पुराणों के अनुसार देखा जाये तो इस दिन स्वर्ग के द्वार खुले रहते है। इस पर्व पर स्नान करने वाला हर एक व्यक्ति अपने पापो का प्रायश्चित कर सकता है और माँ गंगा के आँचल में प्रायश्चित की डुबकी लगा सकता है।

अगर ऐसा कहा जाये की ये स्नानं साक्षात् स्वर्ग के दर्शन करता है तो कुछ गलत नहीं कहा जायेग। ये पावन पर्व समुन्द्र मंथन से जुड़ा हुवा है ।

हम आपको बताते है की ये पावन 4 स्तल क्यों माने जाते है जंहा कुम्भ का मेला भरा जाता हैं।

आइये जानते है इसमें बारे में पुराणिक कथाओ में कहा जाता है की जब देवता और दानवो में बिच समुन्द्र मंथन किया गया था तो जो विष निकला था वो भगवन शिव ने ग्रहण कर लिया था इसी कारणवश भगवन शिव को निलकंठ भी कहा जाता है। और जो अमृत की प्राप्ति हुई थी उस अमृत कलश से चार बुँदे अमृत की इस धरती लोग पर गिरी जिसमे से एक बून्द प्रयाग में गिरी , दूसरी बुंग सर्व शक्तिमान भगवन शिव की नगरी हरिद्वार में गिरी , तीसरी बून्द उज्जैन में गिरी और अंतिम बून्द नासिक में गिरी इसी कारण से इन 4 नगरी को पावन नगरी कहा जाता है। कहा जाता है की कुम्भ 12 होते है 4 इस पृथ्वी लोक में और बाकी शेष 8 देवता लोक मे।

2021 महा कुम्भ मेला इस कोरोना महामारी को देखते हुए केसा रहेगा ये तो ईश्वर ही जाने लेकिन श्रद्धा को कोई महामारी नहीं रोक सकती। कोरोना महामारी का असर इस महा कुम्भ पर जरूर पड़ेगा क्यों की मानव अपने जीवन को संकट में नहीं डालना चाहता। इस कुम्भ मेले में शिव भगत जिसे अघोरि और साधु कहा जाता है उनकी संख्या कम नजर नहीं आएगी क्यों की जो शिव का भगत हो उसको किसका डर।

कोनसी तारीख को होंगे चार बड़े शाही स्नान जानिए :-

14 जनवरी 2021

मकर संक्रांति

स्नान

11 फरवरी 2021

मौनी अमावश्या

स्नान

16 फरवरी 2021

बसंत पंचमी

स्नान

27 फरवरी 2021

मागि पूर्णिमा

स्नान

11 मार्च 2021

महा शिवरात्रि

शाही स्नान

11 अप्रैल 2021

सोमवती अमावश्या

शाही स्नान

11 अप्रैल 2021

चैत्र शुक्ल

स्नान

11 अप्रैल 2021

बैसाखी

शाही स्नान

11 अप्रैल 2021

राम नवमी

स्नान

11 अप्रैल 2021

चैत्र पूर्णिमा

शाही स्नान

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