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संकष्टी चतुर्थी 2021 में कब है, महत्व और पौराणिक कथा

संकष्टी चतुर्थी 2021
April 6, 2021

जानिए संकष्टी चतुर्थी को कब मनाया जाएगा, वर्ष 2021 में यह किन दिनों में मनाई जाएगी, क्या है इस उत्सव की पौराणिक कथा, इससे संबंधित जानकारी और इसका क्या महत्व है?

संकष्टी चतुर्थी 2021  – हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश जी का पूजन ज्यादातर सभी पूजाओं से पहले किया जाता है। इसलिए संकष्टी चतुर्थी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। संकष्ठी चतुर्थी के व्रत से सभी संकटों का नाश करने वाला माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी की यह तिथि भगवान श्री गणेश जी को समर्पित होती है। जिसमें पूजा अराधना की जाती है और व्रत आदि रखें जाते हैं। इस दिन चंद्रमा को आर्घ्य देना चाहिए। माना जाता है इस दिन रखा गया व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब व्रत के अंत में चंद्रमा को आर्घ्य दिया जाता है। 

पुराणों में इसका उल्लेख देखने को मिलता है कि श्री गणेश जी को विवेक और बुद्धि का स्वामित्व प्राप्त है। संकष्टी चतुर्थी के शुभ अवसर पर भगवान श्री गणेश के सभी नामों का उच्चारण किया जाता है। भिन्न स्थानों पर मान्यातों के आधार पर इनके नाम रखें गए हैं। जिसमें सुमुख, कपिल, एकदंत, लंबोदर, गजकर्णक, विघ्न-नाश, विकट, गजानन, भालचंद्र, गणाध्यक्ष, धूम्रकेतुु और विनायक जपें जाने वालों नामों में से कुछ नाम हैं। इन नामों का जाप करने से ही आत्मा की शुद्धि हो जाती है।

 

जाने संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो चतुर्थी आती है जिसमें एक चतुर्थी कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष के समय आती है। माह की पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को ही संकष्टी चतुर्थी मानकर मनाया जाता है। वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। पुराणों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक माह की चतुर्थी गौरी पुत्र गणेश को समर्पित होती है। माह की अमावस्या के बाद पड़ने वाली चतुर्थी की अपेक्षा पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को ज्यादा शुभ और पवित्र माना जाता है। संकष्टी चतुर्थी इस समय ही आती है। भगवान गणेश जी के कई रूप है प्रत्येक चतुर्थी के समय उनके अलग-अलग रूपों को पूजा जाता है। इसलिए प्रत्येक चतुर्थी के बारे में पूरा पता होना जरूरी है।

 

आखिर संकष्टी चतुर्थी को किस लिए मनाया जाता है?

संकष्टी चतुर्थी के शुभ समय में की गई पूजा से यश, वैभव, अच्छे स्वास्थ्य और धन की बारिश होती है। इसलिए इस दिन को मनाया जाता है ताकि भक्तों को गणेश जी के आर्शीवाद से साथ इन चीजों की प्राप्ति हो। यह संकटों का नाश करनें वाला उपवास चंद्र देव के दर्शन से पूर्ण हो जाता है। 

संकष्टी चतुर्थी के में प्रयोग किए जाने वाला शब्द संकष्टी संस्कृत भाषा से लिया गया है। इस शब्द का अर्थ है कि कठिन समय से मुक्त हो जाना। सुखद जीवन की कामना कर भी इस दिन को मनाया जाता है। मंगलवार के दिन आने वाली चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान राम जी के परम भक्त हनुमान जी की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। भारत के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में इसे ज्यादा बड़े स्तर पर मनाया जाता है। 

इस दिन देवताओं के कष्टों के निवारण हेतु भगवान शिव के दोनों पुत्रों ने अपने आप को इस कार्य के लिए सक्षम माना। तब भगवान महादेव ने आदेश दिया कि जो इस पृथ्वी की परिक्रमा कर हमारे सामने उपस्थित होगा वहीं देवताओं के कष्टों का निवारण कर पाएगा। इस समय कार्तिकेय ने अपने मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा करना आरंभ कर दिया। तभी बुद्धि के स्वामित्व प्राप्त गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की और उसे पूरे विश्व की प्रक्रिया के समान माना। इस प्रकार परिक्रमा कर उन्होंने अपने माता पिता के आदेश का पालन कर पूरी सृष्टि की परिक्रमा की। इस कारण से गणेश जी को विजय घोषित कर उन्हें विजय माना गया था।

 

वर्ष 2021 में आने वाली तिथियां 

वर्ष 2021 में आने वाली तिथियों के बारे में जानकर ही इस दिन को मनाना चाहिए, जिसमें हम बीत चुकी तारीखों के बारे में बताने के बाद आने वाली इस साल यह तिथियां कुछ इस प्रकार से आने वाली हैं।

 

इस साल आने वाली तथियां

  1. 30 अप्रैल शुक्रवार के दिन संकष्टी चतुर्थी
  2. 29 मई शनिवार के दिन संकष्टी चतुर्थी
  3. 27 जून रविवार के दिन संकष्टी चतुर्थी
  4. 27 जुलाई मंगलवार के दिन संकष्टी चतुर्थी व अंगारकी चतुर्थी
  5. 25 अगस्त बुधवार के दिन संकष्टी चतुर्थी
  6. 24 सितंबर शुक्रवार के दिन संकष्टी चतुर्थी
  7. 24 अक्टूबर रविवार के दिन संकष्टी चतुर्थी
  8. 23 नवंबर मंगलवार के दिन संकष्टी चतुर्थी व अंगारकी चतुर्थी
  9. 22 दिसंबर बुधवार के दिन संकष्टी चतुर्थी

वर्ष 2021 में इन तिथियों के शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद इन दिनों को मना कर व्रत रखना चाहिए।

  • वर्ष 2021 में मनाई जा चुकी तिथियां
  • 02 जनवरी शनिवार के दिन संकष्टी चतुर्थी थी
  • 31 जनवरी रविवार के दिन संकष्टी चतुर्थी थी
  • 02 मार्च मंगलवार के दिन संकष्टी चतुर्थी व अंगारकी चतुर्थी

वर्ष 2021 में इन दिनों को भक्तों द्वारा मनाया जा चुका है। जो जातक इन दिनों किसी कारण वश इन पवित्र दिनों में पूजा पाठ करने से वंचित रह गए है। वह आने वाले दिनों व्रत व पूजा से पूर्ण फल की प्राप्ति कर सकते है। इस दिन तिल से साथ-साथ मोदक, गुड़ के भोग से गणेश जी बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। 

 

पूजा से संबंधित विशेष जानकारी

  • इस दिन सुबह के समय सूर्योदय से पहले जगकर स्नान किया जाता है।
  • उसके बाद साफ सुथरे वस्त्र पहन कर पूजा में बैठा जाता है।
  •  इस दिन लाल रंग के वस्त्रों पहनना बहुत शुभ माना गया है, इस रंग के वस्त्रों को धारण करने से बहुत शीघ्र फल प्राप्त होता है।
  • इस दिन भगवान श्री गणेश के पूजन से प्रत्येक पूजा का आरंभ करना चाहिए।
  • गणेश संकष्टी के दिन चढ़ाए गए तिल, गुड़, लड्डू आदि को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।
  • इस दिन दुर्गा की प्रतिमा की अराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 
  • दुर्गा माता की प्रतिमा की स्थापना करना इस दिन के समय बहुत शुभ माना जाता है।
  • भगवान श्री गणेश को धूप-दीप जलाकर उनके संबंधित मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए।

संकष्टी चतुर्थी से संबंधित कथा

इस उत्सव से संबंधित कई मान्यताएं और कथाएं भारत में प्रचलित हैं जिसमें से एक कथा के अनुसार एक दिन माता पार्वती को चैपड़ खेलने का मन हुआ और उस दिन इस खेल से संबंधित निर्णय लेने वाला कोई अन्य उपलब्ध नहीं था। 

निर्णय की समस्या के समाधान हेतु माता पार्वती ने एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसमें आत्मा डाल कर उसे जीवित कर दिया। उस जीवित मूर्ति को माता ने खेल में कई बार गलत घोषित किया जिस पर माता ने क्रोधित होकर उसे अपंगता का श्राप दे दिया जिससे वह लंगड़ा हो गया। 

बालक ने अपनी गलती की क्षमा हेतु माता से क्षमा मांगी और कहा कि वह जानता है कि दिए हुए श्राप को वापिस लेना तो असंभव है लेकिन इसके उपाय के लिए जो मैं कर सकता हूं उसके बारे में मुझे बताएं। तब माता पार्वती ने उस बालक को इस संकष्टी चतुर्थी के दिन आने वाले पवित्र दिन के बारे में बताते हुए कहा कि इस यदि तुम कन्याओं का पूजन कर इस दिन व्रत के विधि विधान को पूरी आस्था से करते हो तो तुम इस श्राप से मुक्त हो जाओगे। 

पवित्र दिन – संकष्टी चतुर्थी 

इस दिन उस बालक ने सभी अनुष्ठानों का पालन कर इस व्रत को किया और पूजा अराधना कर भवन श्री गणेश को प्रसन्न किया। जिससे वह श्राप से मुक्त हो गया। इसके बाद उस बालक ने भगवान शिव के पास जाने की कामना की और गणेश जी ने अपना आर्शीवाद देते हुए उसे शिवलोक पहुंचा दिया। जिससे उसकी इच्छा पूर्ण हो गई।

लेकिन जब वह बालक शिवलोक में पहुंचा तो उसने माता पार्वती का वहां अनुपस्थित पाया। माता पार्वती उस समय कैलाश छोड़ कर जा चुकी थी। तब भगवान ने शिव ने बताया कि उनके पुत्र गणेश जी की पूजा से प्रसन्न होकर वह वापिस आ सकती हैं। तब बालक ने उस दिन का पूरी आस्था और पूजा से उस दिन के अनुष्ठानों का पालन कर इस दिन को मनाया। जिसके फलस्वरूप माता पार्वती ने पुन शिवलोक में प्रस्थान किया।

 

हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का महत्व

स्नातक धर्म में भगवान गणेश जी का विशेष महत्व है और पूजा को आरंभ करने से पहले इनका ध्यान किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भारत में इस दिन बड़े स्तर पर पूजा पाठ का आयोजन किया जाता है। इस दिन संतान की दीर्घ आयु और खुश हाल जीवन की कामना कर इस दिन व्रत रखा जाता है। भगवान श्री गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है क्यांेकि यह भक्तों के सारे कष्टों का नाश कर देते हैं। इस दिन इनके आर्शीवाद की प्राप्ति के लिए व्रत को पूरे विधि विधान से किया जाता है। इस दिन की गई पूजा से जीवन में आने वाली प्रत्येक बाधा दूर हो जाती है। 

मान्यताओं के अनुसार इस दिन रखे गए व्रत से संतान को निरोग जीवन प्राप्त होता है। शास्त्रों मे इस दिन रखे गए व्रत को सभी में श्रेष्ठ माना गया है क्यांेकि इनको प्रथम देव के रूप में जाना जाता है। सूर्योदय के साथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत आरंभ होकर चंद्रमा के उदय होने तक यह व्रत किया जाता है। पूरे वर्ष में संकष्टी चतुर्थी के कुल 13 व्रत रखे जाते हैं और प्रत्येक व्रत का अपना महत्व है। इस दिन भारत में अलग-अलग राज्यों में सकट चैथ, वक्रतुंडी चतुर्थी, तिलकुटा चौथ और माही चतुर्थी के नाम से बुलाया जाता है।

हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को आरंभ करने से पहले गणेश जी के पूजन को उत्तम माना जाता है। इस दिन किए गए पूजन से सभी नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं, इसलिए मन से बुरे विचारों से दूरी बनाकर इस दिन को पूरी आस्था और श्रद्धा से मनाना चाहिए। 

 

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