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Savan Ka Dusara Somvar 2022 | जानिए सावन का दूसरा सोमवार कब है और क्यों मनाया जाता है।

जानिए सावन का दूसरा सोमवार कब है ,
January 19, 2022

सावन का दूसरा सोमवार 2022  कब है ? 

 पौराणिक कथाओं तथा मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास शुरू होते ही व्रतों का  त्यौहार शुरू हो जाता है। श्रावण मास में जितने भी व्रत धारण किए जाते हैं। वह सभी भगवान शिव को आराध्य मान करके ही धारण किए जाते हैं। मान्यता है, श्रावण मास के सभी व्रत भगवान शिव को ही अर्पित होते हैं। श्रावण मास में जो भी  श्रद्धालु श्रावण मास के चारों सोमवार व्रत रखते हैं। उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा  प्राप्त होती है। इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार  व्रत 25  जुलाई 2022  को रखा जाएगा। आइए जानते हैं श्रावण मास व्रत क्यों रखे जाते हैं और व्रत धारण करने की सही विधि क्या है?

सावन सोमवार व्रत का महत्व

 हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह खत्म होते ही श्रावण मास शुरू हो जाता है।  इस दिन भक्तगण भगवान शिव की विशेष पूजा अर्चना करते हैं और कावड़ यात्रा निकालते हैं। पौराणिक कथाओं में मान्यता है कि श्रावण मास में जितने भी धार्मिक कार्य तथा धार्मिक पाठ पठन किए जाते हैं। वह विशेष फलों की प्राप्ति के कारक होते हैं। साथ ही जो श्रद्धालु श्रावण मास के चारों सोमवार व्रत धारण करते हैं। वह भगवान शिव की विशेष कृपा के हकदार होते हैं। सोमवार का व्रत धारण करने वाले श्रद्धालु मान चित बुद्धि से भगवान शिव को भजते हैं।

 सावन सोमवार व्रत विधि

सावन सोमवार दूसरे सोमवार के दिन श्रद्धालुओं को सवेरे जल्दी उठना चाहिए और शारीरिक स्वच्छ होकर जिस स्थान पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है। अर्थात उस स्थान को साफ सुथरा तथा स्वच्छ बनाएं।

शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध, गंगा जल, बेल पत्र, फूल, चावल आदि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा करें।

भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र “ओम नमः शिवाय” का जाप करें।

संपूर्ण दिन निराहार रहकर व्रत का संकल्प लें।

सूर्य अस्त होने के बाद व्रत सात्विक भोजन के साथ पारण करें।

 सावन सोमवार शिव पूजा विधि

श्रावण मास शुरू होते ही श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा अर्चना विधि विधान से करना शुरू कर देते हैं। इस दिन श्रद्धालु महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराते हैं। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, जंवाफूल कनेर, राई फूल आदि शिव को अर्पित किए जाता है। तथा भगवान शिव को भोग के रूप में  धतूरा तथा श्रीफल का भोग लगाया जाता है।

संपूर्ण अभिषेक कर भोग लगाने के बाद श्रद्धालु भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हैं और षोडशोपचार पूजन करते हैं।

 सावन सोमवार व्रत क्यों धारण किया जाता है और सावन का दूसरा सोमवार क्यों है महत्वपूर्ण ?

 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास भगवान शिव को अति प्रिय है। तथा भगवान से इस मास में अति प्रसन्न रहते हैं, और श्रद्धालुओं के सभी मनोरथ सफल करते हैं। इन्हीं मान्यताओं के चलते श्रद्धालु गण श्रावण मास को चारों सोमवार के व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। तथा भगवान शिव की विशेष कृपा के हकदार बनते हैं। सावन महीने में जो भी व्रत रखे जाते हैं वह भगवान शिव को ही अर्पित होते हैं। तथा श्रद्धालुओं को भगवान शिव की विशेष कृपा अर्थात मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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