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Utpanna Ekadashi | उत्त्पन्ना एकादशी 2022 | कब है, महत्व, पूजा विधि, कथा, लाभ

Utpanna Ekadashi
October 13, 2022

उत्त्पन्ना एकादशी 2022 – Utpanna Ekadashi 2022

Utpanna Ekadashi – हिन्दू पौराणिक कथाओ की मान्यताओं के अनुसार यह पर्व मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी वाले दिन होता है।ऐसा माना जाता है कि उत्पन्ना एकादशी वाले दिन व्रत \उपवास का पालन करने से मनुष्य के सभी बड़े से बड़े पाप नष्ट हो जाते हैं इस दिन भगवान् श्री विष्णु ने उत्पन्न होकर राक्षस मरू का वध किया था। इसीलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को करने से मनुष्य के पूर्व जन्म के पाप भी नष्ट हो जाते है। उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत पूर्ण रूप से भगवन श्री विष्णु को समर्पित है।

Utpanna Ekadashi – इस उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। और यह व्रत संतान प्राप्ति और आरोग्य रहने के लिए भी किया जाता है। उत्तरी भारत के कई राज्यों में ये व्रत अलग अलग महीनो में भी किया जाता है। यह उत्तपन्ना एकादशी मार्गशीर्ष के पावन महीने में मनाई जाती है। लेकिन महाराष्ट्र,करनाटक,गुजरात और आंध्र प्रदेश आदि कई राज्यों में ये उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत कार्तिक माह में मनाया जाता है। 

Utpanna Ekadashi

उत्त्पन्ना एकादशी कब है – Utpanna Ekadashi Kab Hai 

Utpanna Ekadashi – साल 2022 में उत्त्पन्ना एकादशी 20 नवंबर 2022 यानी रविवार के दिन मनाई जायेगी। वह उत्त्पन्ना एकादशी सम्पूर्ण रूप से भगवान् श्री विष्णु को समर्पित है। इस व्रत को करने से भगवान् श्री विष्णु प्रसन्न होते है। और अपना कृपा और आशीर्वाद अपने भक्तो को देते है। जिससे भक्तो का जीवन आनंद से बीत जाता है। 

उत्त्पन्ना एकादशी का महत्व – Utpanna Ekadashi Ka Mahatva  

Utpanna Ekadashi – इस उत्तपन्ना एकादशी के व्रत को करने से भगवान् श्री विष्णु की कृपा उनके भक्तो पर बानी रहती है। इस व्रत का मुख्य विशेषता ये भी है की इस व्रत को करने से भक्तो को सभी तीर्थो के दर्शन के बराबर के फल की प्राप्ति होती है। इस महान उत्त्पन्न एकादशी का व्रत वाले दिन दान करने से अगले जन्मो तक भी इस का फल भगवान् श्री विष्णु की कृपा से मिलता रहता है। इस उत्त्पन्ना एकादशी के व्रत को करने से भक्तो के जीवन में आनंद रहता है और माता लक्ष्मी की कृपा भी बानी रहती है। 

 उत्त्पन्ना एकादशी की पूजा विधि – Utpanna Ekadashi Ki Pujan Vidhi 

Utpanna Ekadashi – उत्त्पन्ना एकादशी वाले दिन ब्रह्मवेला में भगवान विष्णु को पुष्प,जल,धूप,दीप,अक्षत से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उत्त्पन्ना एकादशी व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है।  इस व्रत में दान करने से कई लाख गुना पूजा करने का फल मिलता है। उत्पन्ना एकादशी पर धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से भगवान् श्री विष्णु की पूजा-अर्चना करना चाहिए। साथ ही इसी दिन माता लक्ष्मी की पूजा करना भी विशेष फल प्रदान करता है। 

  • भक्तो को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके निवृत्त हो जाना चाहिए।
  • उसके बाद अपने घर के मंदिर में घी का दीप प्रज्वलित करें।
  • भगवान श्री विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करना चाहिए ।
  • भगवान श्री विष्णु को पुष्प,फूल माला और तुलसी दल चढ़ाएं।
  • अगर संभव हो तो इस दिन निराहार रहकर पुरे दिन व्रत भी रखें।
  • भगवान श्री विष्णु की उच्च स्वर में अपने परिवार सहितआरती करें। 
  • भगवान श्री विष्णु को भोग लगाएं। इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखें कि भगवान श्री विष्णु को सिर्फ सात्विक – भोज का ही भोग लगाएं। भगवान  श्री विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। -ऐसी मान्यता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। और प्रसन्न नहीं होते है 
  • इस पावन व्रत वाले दिन भगवान श्री विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी जरूर करें।
  • इस पवित्र उत्त्पन्न एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु का हो सके तो अधिक से अधिक ध्यान करें। 

उत्त्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा – Utpanna Ekadashi Ki Pouranik Katha 

Utpanna Ekadashi – हिन्दुओ के पद्म पुराण में एकादशी के बारे में विस्तार से पूर्ण जानकारी दी गई है। ऐसा माना जाता है कि एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से एकादशी की कथा के बारे में जानकारी प्राप्त करने की इच्छा जताई। फिर उसी समय तत्काल रूप से भगवान श्री कृष्ण ने कहा-हे धर्मराज! सतयुग में मुर नाम का राक्षस था जिसने देवताओ को पराजित (हरा) कर स्वर्ग पर अपना अधिकार जमा लिया था। तीनों लोकों में हाहाकार मच गया था। सभी देवता और ऋषिगण अपनी इस भयंकर परेशानी को लेकर महादेव के पास पहुंचें।

Utpanna Ekadashi- भगवान श्री शिव शंकर ने कहा-इस समस्या का सम्पूर्ण समाधान भगवान श्री विष्णु जी के पास ही मिलेगा है। अतः हमें उनके पास जाने की आवश्कता है। उसके बात सभी देवता भगवान श्री विष्णु जी के पास जाकर उन्हें सम्पूर्ण स्थिति से अवगत कराया गया। कालांतर में भगवान श्रीहरि विष्णु ने असुर मुर के सैकड़ों सेनापतियों का युद्ध में वध कर विश्राम करने हेतु बद्रिकाश्रम में चले गए। सेनापतियों के वध का समाचार ,मिला तो वो क्रोधित होकर मुर बद्रिकाश्रम में पहुंच गया।

तब उसी समय भगवान श्री विष्णु के शरीर से एक कन्या का जन्म हुआ। तभी कन्या और असुर मुर के बीच भीषण युद्ध आरम्भ हुआ। इस युद्ध में कन्या ने असुर मुर का युद्ध में वध कर दिया। जब भगवान श्री विष्णु अपनी निद्रावस्था से जागृत हुए, तो उस कन्या के इस उत्तम कार्य से अति प्रसन्न होकर कन्या को एकादशी के नाम दिया और एकादशी तिथि को अति प्रिय बताया। तब देवी-देवताओं ने कन्या की वंदना उसका सम्मान भी किया । कालांतर से एकादशी के दिन भगवान  श्री विष्णु जी की पूजा पूजा-उपासना की जाती है।

 उत्त्पन्ना एकादशी के लाभ – Uttpanna Ekadashi Ke Labh 

उत्त्पन्ना एकादशी के पांच (5) मुख्य लाभ जो निम्न प्रकार से है। 

  • इस उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत निर्जला रहकर करने से मनुष्य के सभी पापो का नाश हो जाता है। 
  • इस उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत करने से हजार वाजपेय और अश्वमेघ की महान पूजा करने का फल मिलता है। 
  • जो भी भक्त इस उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत को करता है। उस पर भगवन श्री विष्णु की अति कृपा बरसती है। जिससे देवता और हमारे पितरो को भी शांति मिलती है। 
  • इस उत्त्पन्ना एकादशी के व्रत को करने के सभी तीर्थो के दर्शन करने के बराबर का फल भी मिलता है। इस उत्त्पन्ना एकादशी के दिन दान करने से कई गुना फल मिलता है ,
  • इस उत्त्पन्ना एकादशी का व्रत पूरी विधि विधान से निर्जला रहकर भक्तिमय होकर करने से मोक्ष व श्री हरी धाम की प्राप्ति होती है।  

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