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बुद्ध पूर्णिमा 2022 में कब है, महत्व और यह क्यों मनाया जाता है | Budh Purnima 2022

बुद्ध पूर्णिमा 2022
January 18, 2022

आइए आज जानते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा 2022 में कब है और इसका क्या महत्व है, वर्ष के किस समय यह त्यौहार आता है, बुद्ध पूर्णिमा को क्यों मनाया जाता है?

बुद्ध पूर्णिमा 2022 – बुद्ध पूर्णिमा ऐसा त्योहार है जिसे भारत के अलावा अन्य देशों में भी मनाया जाता है। भारत में इसे वेसाक या विशाखा पूजा से भी जाना जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह पर्व बहुत विशेष होता है, लेकिन हिंदू धर्म में भी यह दिन बहुत विशेष माना जाता है। गौतम बुद्ध को भगवान श्री विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है और बौद्ध के संस्थापक भी यहीं हैं। इसलिए गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में भी इसे मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के अप्रैल या मई माह में पूर्णिमा का दिन आता है। कहा जाता है गौतम बुद्ध जी ने जब आत्मज्ञान प्राप्त किया था उसी दिन शरीर त्याग कर वह मानव जीवन से मुक्त हो गए थे।

गौतम बुद्ध का जन्म 562 ई.पू. में हुआ था और इनका नाम सिद्धार्थ रखा गया था। अधिकतर लोगों द्वारा माना जाता है कि नेपाल के लुम्बिनी नामक स्थान पर इनका जन्म हुआ था। सन 483 ई.पू. में भारत के उत्तर प्रदेश में कुशीनगर में इनका देहांत हुआ था। अपने 80 साल के जीवनकाल में इन्होंने बहुत लोगों का उद्धार अपने प्रवचनों द्वारा किया है। सोलह वर्ष की आयु में इनका विवाह भी हो गया था। इन्होंने पूरी माया का त्याग कर वर्षों की कठोर तपस्या से आत्मज्ञान को प्राप्त किया था। गौतम बुद्ध जी को समर्पित इस बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव को मनाया जाता है।

 

जानिए कब आती है यह बुद्ध पूर्णिमा (Budh Purnima kab Hai)

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के वैशाख माह में आने वाली पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मानकर उत्सव की भांति मनाया जाता है। इसे वैशाख पूर्णिमा कहे जाने के पीछे भी यही कारण है। वर्तमान समय में प्रयोग किए जाने वाले कैलेंडर के हिसाब से साल के अप्रैल या मई महीने में बुद्ध पूर्णिमा आती है। प्रत्येक वर्ष आने वाला यह उत्सव भारत में नहीं बल्कि चीन, नेपाल, पाकिस्तान, इंडोनेशिया आदि देशों में मनाए जाने वाला पर्व है। पूर्णिमा तिथि के आरंभ होने के आधार पर इसे मनाया जाता है। श्री लंका में इसे वेसाक उत्सव के नाम से मनाते हैं।

 

क्यों बुद्ध पूर्णिमा को मनाया जाता है? (Budh Purnima Kyu Manate Hai)

उत्तरी भारत में प्रचलित मान्ताओं के अनुसार गौतम बुद्ध जी भगवान श्री विष्णु के नौवें अवतार थे और भगवान विष्णु के अवतार के जन्मदिन को मानकर बुद्ध पूर्णिमा को मनाया जाता है। वहीं बौद्ध धर्म के अनुयायी मानते हैं कि जब गौतम बुद्ध सत्य व आत्मज्ञान के खोज में निकले थे, तब उन्होंने निर्णय लिया था जब तक उनको आत्मज्ञान प्राप्त नहीं हो जाता वह मात्र तपस्या ही करेंगे। तभी वैशाख माह की पूर्णिमा को उनको बुद्धत्व ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। 

इन कारणों से बुद्ध पूर्णिमा को मनाया जाता है और बड़े स्तर पर बोधिवृक्ष और सत्यनारायण की पूजा का आयोजन किया जाता है। अलग धर्माें और स्थानों के आधार पर इस दिन की जाने वाली परंपराएं और विधि विधान अलग हो सकते हैं किंतु प्रत्येक धर्म में यह दिन गौतम बुद्ध जी को समर्पित होता है। मान्यताओं के अनुसार बोधिवृक्ष के नीचे बैठकर ही भगवान बुद्ध ने अपनी कठोर तपस्या की थी। इसलिए इस वृक्ष को बहुत पवित्र माना गया है।

 

बुद्ध पूर्णिमा 2022 का दिन और पूजा मुहूर्त (Budh Purnima Muhurat)

वर्ष 2022 में 16 मई को सोमवार  के दिन बुद्ध पूर्णिमा का पर्व आने वाला है। सोमवार  के दिन आने के कारण इस वर्ष का त्योहार बहुत विशेष हो जाता है। इस दिन लोगों द्वारा घरों को फूलों से सजाया जाता है और प्रत्येक कोने में दीपक का प्रकाश बिखरा हुआ होता है। पूर्णिमा आरंभ और समाप्त होने के मध्य काल में की गई पूजा को बहुत शुभ माना जाता है। इसके लिए पूर्णिमा की तिथि का ज्ञात होना अति आवश्यक है।

 

वर्ष 2022  में 15  मई को रविवार दोपहर  को 12  बजकर 45  मिनट पर पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी और अगले सोमवार  1 6 मई को प्रातः 09 बजकर 43  मिनट तक रहेगी। 

यह दिन पितरों से संबंधित पूजा के लिए भी शुभ है। इस पूर्णिमा अवधि में किए गए दान से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। 

 

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व (Budh Purnima Mahatva)

हिंदू धर्म में माना जाता है कि भगवान विष्णु ने इस दिन अपना नौवां अवतार इस पृथ्वी पर लिया था। इसलिए इस दिन को बहुत पवित्र माना जाता है। वहीं दूसरी तरफ इसी दिन गौतम बुद्ध जी के जन्म के साथ साथ उनको सत्य के ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस दिन सदाचार जीवन को अपनाने के साथ हिंसा का त्याग करने का प्रण लिया जाता है और प्रार्थना व पूजा की जाती है।

बोधगया को बहुत पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में देखा जाता है, बुद्ध पूर्णिमा के दिन इस तीर्थ स्थल पर विशेष प्रकार से उत्सव का आयोजन कर यह दिन मनाया जाता है। गौतम बुद्ध ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए सारी संपत्ति और सांसारिक सुखों का त्याग कर एक तपस्वी के रूप में अपना जीवन व्यतीत किया था। लोगों की इनके प्रति बहुत आस्था है और इसलिए दिन का भी भक्तों व बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धा से की गई प्रार्थना और आराधना से सारे कष्टों का निवारण हो जाता है।

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