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Kark Sankranti 2023 | कर्क संक्रांति 2023 कब है , महत्व, पूजा विधि तथा शुभ मुहूर्त , क्यों मनाई जाती है?

Kark Sankranti 2023
September 27, 2021

Kark Sankranti – कर्क संक्रांति 2023 में कब हैै

कर्क संक्रांति सूर्य देव के दक्षिणायन यात्रा का प्रतीक होता है। अर्थात जब सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन को कर्क सक्रांति के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2023 में कर्क संक्रांति 16 जुलाई 2023 रविवार को मनाई जाएगी। कर्क संक्रांति को छह माह के उत्तरायण काल का अंत माना जाता है। तथा इस दी को सूर्य के दक्षिणायन दिशा की यात्रा का शुभारंभ होता है।

मान्यताओं के अनुसार इस दिन जब सूर्य कर्क राशी में प्रवेश करते हैं, तो मौसम में भी बदलाव देखने को मिलता है। बारिश का मौसम भी खुलकर आता है जोकि कृषि के लिए अति आवश्यक है। सूर्य की दक्षिणायन यात्रा इस दिन से शुरू होकर मकर सक्रांति अर्थात जनवरी 2024 तक चलेगी। मान्यताओं के अनुसार इस दिन  दान पुण्य करना अभीष्ट फलों के कारक होते हैं।

 आइए जानते हैं कर्क संक्रांति का महत्व, पूजा विधि, तथा शुभ मुहूर्त। कर्क संक्रांति 2023 का महत्व आज आप किस आर्टिकल में पढ़ने जा रहे हैं। अतः सभी जातक इसे ध्यान पूर्वक जरूर पढ़ें।

कर्क संक्रांति का महत्व

हिंदू धर्म में कर्क संक्रांति का बहुत बड़ा महत्व है। इस दिन को वर्षा मौसम की शुरुआत मानी जाती है। भारत कृषि प्रधान देश है। यहां पर मानसून का प्रवेश कर्क सक्रांति के दिन से ही होता है। क्योंकि जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है और दक्षिणायन यात्रा प्रारंभ करता है। तब से मौसम में बहुत बड़ा बदलाव जरूर होता है। सन 2023 में 16 जुलाई 2023 शुक्रवार से सूर्य अपनी यात्रा प्रारंभ कर रहे हैं। अर्थात दक्षिणायन यात्रा शुरू होने वाली है। इस दिन जो भी जातक दान पुण्य करते हैं। उन्हें सफल मनोरथ प्राप्त होते हैं।

जो लोग अपने पूर्वजों के लिए पितृ तर्पण करना चाहते हैं। वे दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करने के लिए कर्क संक्रांति की प्रतीक्षा करते हैं। सूर्य जब मकर सक्रांति अर्थात मकर राशि में होते हैं। तब अग्नि का प्रकोप अधिक रहता है और जब कर्क सक्रांति में प्रवेश करता हैं इस दिन से जल तत्व की अधिकता बढ़ जाती है। इसीलिए इस दिन से मौसम की शुरुआत अर्थात बारिश का शुभारंभ माना जाता है।

कर्क संक्रांति शुभ मुहूर्त

जब सूर्य मकर राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, और छह माह की   दक्षिणायन यात्रा प्रारंभ करते है, वह दिन मानव जाति के लिए अच्छे समय का शुभारंभ माना जाता है। सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करते ही मौसम में सबसे बड़ा बदलाव देखा जाता है और बारिश की संभावनाएं बढ़ जाती है। इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान करके जो भी दान किया जाता है। वह अभीष्ट फल की प्राप्ति जरूर करवाता है। इसलिए इस दिन दान पुण्य करना श्रेष्ठ रहता है सन 2023 मकर सक्रांति का शुभारंभ निम्न प्रकार से रहेगा अर्थात शुभ मुहूर्त इस प्रकार से है

 

कर्क संक्रांति पुण्य काल – 12:13 PM से 06:44 PM तक

संक्रांति महा पुण्य काल – 04:34 PM से 06:44 PM तक

जानिए कर्क संक्रांति पूजा विधि

सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश करना और दर्शन यात्रा शुभ का शुभारंभ होना मानव जाति के लिए शुभ होता है। यह भी माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु 4 मास के लिए शयन के लिए चले जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना अतिशय श्रेष्ठ माना गया है। मान्यताओं के अनुसार इस कर्क संक्रांति के साथ आने वाली देवशयनी एकादशी को ही भगवान विष्णु शयन को जाते हैं।

  • इस दिन श्रद्धालु को सुबह जल्दी उठकर शारीरिक स्वच्छ होकर नदी, तालाब या कुंड के पानी से स्नान करना चाहिए।
  • स्नान के बाद सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए। तथा सूर्य मंत्र का जाप करें।
  • इसके पश्चात भगवान विष्णु का ध्यान करें और ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का आस्था के साथ जाप करें।
  • तत्पश्चात ब्राह्मणों को, गरीबों को, गायों को आदि को आवश्यक वस्तुएं तथा चारा दान करना चाहिए।
  • संपूर्ण कार्य विधि विधान से करने पर श्रद्धालुओं को अतिशय सुख की प्राप्ति होती है। किया गया दान पुण्य व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि का वास करता है।

कर्क संक्रांति को दान करने योग्य सामग्री

हिंदू धर्म में दान करना अति श्रेष्ठ बताया गया है। उचित समय पर उचित वस्तु का दान शुभ फलों की प्राप्ति कारक होता है। हिंदी पौराणिक कथाओं के अनुसार यह सिद्ध होता है कि श्रेष्ठ समय पर श्रेष्ठ वस्तु का दान पुरुष को अति श्रेष्ठ अवश्य बनाता है। जो भी श्रद्धालु भक्ति भाव तथा भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। उन्हें कर्क संक्रांति को दान पुण्य करना श्रेष्ठ रहता है। अगर श्रद्धालु उचित समय पर निम्नलिखित वस्तुओं का दान कर सक्रांति के दिन करते हैं उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं:-

  • सुहागन बुजुर्ग महिला को वस्त्र दान करना।
  • बुजुर्ग को पूजा में पहनने वाला धोती वस्त्र आदि दान करना।
  • किसी बालिका को नारंगी रंग का परिधान तथा वस्त्र आदि दान करना।
  • बालक को हरे फल  का दान करना।
  • किसी नवविवाहित दम्पत्ति को भोजन कराना तथा कुछ ना कुछ भेंट स्वरूप देना।
  •  यह सभी वस्तुएं दान किए जाने पर श्रद्धालुओं  के लिए श्रेष्ठ बताई गई है।Saphala Ekadashi 2022 | सफला एकादशी 2022 में कब है

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