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एकादशी माता की आरती | जानिए क्यों मनाया जाता है ये व्रत

एकादशी माता की आरती
March 3, 2021

जानियें एकादशी माता की आरती और देवी एकादशी के बारे में

एकादशी माता की आरती – मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को उत्पन्ना एकादशी के रूप में मनाया जाता है। उत्पन्ना एकादशी को वैतरणी एकादशी या उत्पातिका एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। एकादशी पर भगवान विष्णु और माँ एकादशी की पूजा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या आप लोग जानते हो कि व्रत में सर्वश्रेष्ठ एकादशी वास्तव में एक देवी है। ऐसा माना जाता है कि एकादशी की देवी का जन्म उत्पन्ना एकादशी के दिन हुआ था। इसलिए इस एकादशी को उत्पन्ना कहा जाता है। एकादशी देवी का जन्म भगवान विष्णु के शरीर से हुआ हैं।

वैष्णवों के बीच एक मान्यता है कि प्राचीन काल में मुर नामक एक राक्षस था। उसने इंद्रलोक को जीतने के बाद पूरी पृथ्वी को जीत लिया। उसके अत्याचारों से भयभीत और चिंतित सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे। मृतकों से बचाने के लिए देवताओं से प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने देवताओं को उन्हें इस समस्या से बहार निकलने का आश्वासन दिया। तब भगवान विष्णु ने ध्यान लगाया और स्वयं को देवी एकादशी के रूप में प्रकट किया। वह उन्हें असुरों के आतंक से देवताओं की रक्षा के लिए, मुर नामक राक्षस को मारने का आदेश देते है। एकादशी देवी ने भगवान को प्रणाम किया और मुर को मार डाला। तब से, सभी के लिए परवाह करने वाली एकादशी भगवान विष्णु की सबसे प्रिय बन गई।

ॐ जय एकादशी माता, जय हो एकादशी माता। यहां पाठकों के लिए एकादशी आरती है। इस आरती में सभी एकादशियों के नाम शामिल हैं। विष्णु पूजा व्रत को प्राप्त करके, शक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। ।। ॐ।।

एकादशी माता की आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी…॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।

गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी…॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी…॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी…॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी…॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।

नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी…॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।

नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी…॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥

ॐ जय एकादशी…॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी…॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी…॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी…॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।

शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी…॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी…॥

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