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Vishweshwar Vrat | विश्वेश्वर व्रत 2022 | व्रत की कथा,महत्व,विधि,लाभ

Vishweshwar Vrat
October 13, 2022

विश्वेश्वर व्रत 2022 – VishweshwarVrat 2022

Vishweshwar vrat – हमारे हिन्दू शाश्त्रो की मान्यताओं के अनुसार, इस साल 2022 में विश्वेश्वर व्रत 6 नवंबर 2022 को यानि रविवार को है।  विश्वेश्वर भगवान् शिव को कहा जाता है. कर्नाटक में भगवान विश्वेश्वर (शिव) मंदिर, येलुरु श्री विश्वेश्वर मंदिर के रूप में विख्यात है। यह मंदिर पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर महाथोबारा येलुरु श्री विश्वेश्वर मंदिर के नाम से भी सुप्रसिध्द है. धार्मिक पुराणों में, भगवान शिव को विश्वनाथ को भगवान् शिव के रूप में भी जाना जाता है. यही कारण है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के नाम से सुप्रसिद्ध भगवान श्री विश्वेश्वर के 12वें ज्योतिर्लिंग का नाम रखा गया है। 

विश्वेश्वर के व्रत की कथा – Vishweshwar Vrat Ki Katha 

Vishweshwar vrat – हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओं की मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में, कुथार राजवंश का एक शूद्र राजा था, जिसको  कुंडा राजा के रूप में भी जाना जाता था,इस राजा ने एक बार भार्गव मुनि को अपने साम्राज्य में पधारने का आमंत्रित दिया था। फिर  भार्गव मुनि ने राजा को यह कहते हुए निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था कि तुम्हारे राज्य में मंदिरों और पवित्र नदियों की उपस्थिति का अभाव (कम) है। इसी लिए मै तुम्हारे साम्राज्य में नहीं आसकता हूँ। 

Vishweshwar vrat – कुंड के राजा इस बात से बहुत ही निराश हो गए कि उन्होनें अपने ही किसी सहायक के विश्वास पर को राज्य छोड़ दिया और भगवान शिव को प्रसन्न (मनाने) करने के लिए एक बहुत ही महान यज्ञ करने गंगा नदी के तट पर आगए। कुंडा के राजा की भक्तिभाव से किये गए महान यज्ञ से बहुत ही प्रसन्न हुए,और फिर  भगवान श्री शिव शंकर उनके राज्य में आकर रहने की इच्छा से सहमत हुए।

Vishweshwar vrat – भगवान शिव जब कुंडा राजा के राज्य में आकर निवास करना प्राम्भ कर दिया। तोफिर एक दिन अचानक एक आदिवासी महिला जंगल में अपने खोए हुए बेटे की तलाश में कुंडा के साम्राज्य में घूम रही थी। उसने अपनी तलवार का इस्तेमाल एक कंद के एक पेड़ को काटने के लिए किया और फिर उसमें से खून (रक्त) बहाव होना शुरू हो गया। तब उसे ऐसा लगा की वह कंद का पेड़ नहीं उसका पुत्र ही  था और वह  अपने बेटे का नाम जो की ‘येलु’ था तो वो उसका नाम पुकारते हुए जोर से रोना शुरू कर दिया..

Vishweshwar vrat – तब उसी क्षण उसी स्थान पर  लिंग के रूप में भगवान श्री शिव शंकर उस स्थान पर प्रकट हो गए | और फिर उसी  स्थान पर बने मंदिर को आज हम लोग  ‘येल्लुरु’ विश्वेश्वर मंदिर के नाम से जानते है। उसी लिंग पर पड़ा वह निशान अभी भी हमे देखने को मिलता है। ऐसी मान्यता है कि कुंडा राजा अपने द्वारा उस पर नारियल का पानी डालने के पश्यत ही कंद के पेड़ से खून (रक्त) बहना बंद हुआ था। भगवान श्री शिवशंकर  को नारियल पानी या नारियल का तेल चढ़ाना इस ‘येल्लुरु’ मंदिर का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। भगवान शंकर को चढ़ाया जाने वाला तेल मंदिर में दीपक को  जलाने के लिए इकट्ठा कर के भी रखा जाता है। 

Vishweshwar vrat – हूयमर भीष्म पंचक के दौरान लगातार पांच दिवस तक चलने वाले इस उत्सव में तुलसी विवाह भी शामिल है, जो हिंदू धर्म में एक अति महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में मनाया जाता है।  विश्वेश्वरा व्रत के अगले दिन वैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाने का भी विधान है।और इस दिन भगवान श्री शिवशंकर के भक्त पवित्र गंगा नदी के घाटों पर भगवान् शंकर का नाम लेते हुए  पवित्र मणिकर्णिका स्नान भी करते है।

विश्वेश्वर व्रत का महत्व – Vishweshwar Vrat Ka Mahatva

इस विश्वेश्वर (भगवान् शिव को समर्पित) व्रत की महिमा भी बहुत ही निराली है। यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु किया जाता है, इसलिए माना जाता है कि इस विश्वेश्वर व्रत का पालन करने से  भगवान शिव जी से जो भी वरदान मनुष्य द्वारा मांगा जाता है, वह मनुष्य को जरूर प्राप्त होता है। भगवान शिव के इस स्वरूप को समर्पित एक मंदिर का निर्माण  कर्नाटक में भी किया गया है, जिसे हम सभी विश्वेश्वर मंदिर के नाम से जानते है। इसके अलावा ‘येलुरु’ श्री विश्वेश्वर मंदिर भी सुप्रसिद्ध है, जिसे महाथोबारा ‘येलुरु’ में ये मंदिर श्री विश्वेश्वर मंदिर के नाम से प्रसिद्द है। भगवान शिव को समर्पित यह व्रत करने से मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और आनंद भरपूर रहता है। विश्वेश्वर व्रत के दिन अपनी सभी प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक भी जरूर करवाना चाहिये ।

विश्वेश्वर व्रत की विधि – Vishweshwar Vrat Ki Vidhi 

इस विश्वेश्वर व्रत को करने वाले मनुष्य को प्रातः कल जल्दी उठ कर स्नानं आदि से निवृत हो कर अपने घर में घी का दीपक जलाना चाहिए। 

फिर भगवन शिवशंकर के मंदिर में जाकर जल से या कच्चे दूध से शिवलिंग पर चढ़ाना चाइये। शिवलिंग को ताजे फूलो से सजाना चाहिए। और स्वादिष्ट मिठाई का भोग लगाना चाहिए इससे भगवन शिव अति प्रसन्न होते है। और अपने भक्तो की सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करने का वरदान भी देते है,इस दिन भगवन शिव का असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने केलिए हमे उपवास भी करना चाहिए। और फिर अगले दिन ताजा खाना खा कर अपने व्रत को तोडना चाहिए। 

विश्वेश्वर व्रत का लाभ – Vishweshwar Vrat Ka Labh 

विश्वेश्वर का व्रत विशेष लाभ मिलता है। जी भी मनुष्य इस व्रत को करता है वह निरोगी जीवन जीता है। भगवान् शिव की उपासना करने वाले भक्तो के जीवन में सदैव सुख, समृद्धि, और आनंद रहता है ,ऐसा माना जाता है की हमारे 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से शिव भक्त को मरणोपरांत उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।  मरणोपरांत भक्त की आत्मा को शांति मिलती है वह कही भी भटकती नहीं है ,ऐसे ही और भी अनन्य अनेको लाभ मिलते है। इसी लिए हमे निरंतर भगवान् शिव की पूजा आराधना करनी चाहिए। 

 

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