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Skand Shasti 2021 | स्कंद षष्ठी 2021, व्रत क्यों रखा जाता है, महत्व, व्रत लाभ एवं पूजा विधि

स्कंद षष्ठी 2021
July 9, 2021

स्कंद षष्ठी 2021 कब है , जानिए सम्पूर्ण जानकारी 

स्कंध षष्ठी 2021 सम्पूर्ण कैलेंडर – अगर आप स्कंद षष्ठी व्रत को धारण करना चाहते हैं। तो आपको इस आर्टिकल में बताई गई व्रत संबंधी संपूर्ण विधि विधान को ध्यान पूर्वक पढ़ लेना चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय को ही स्कंध कहा जाता है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष और कार्तिक मास शुक्ल पक्ष के विशिष्ट अतिथि को स्कंध षष्ठी व्रत के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय जो कि भगवान गणेश के बड़े भाई हैं। इनकी आस्था में ही स्कंद षष्ठी व्रत रखा जाता है। अधिकतर इस व्रत को दक्षिण भारत में अधिक महत्व दिया जाता है और बड़े विधि विधान के साथ कार्तिकेय की पूजा की जाती है। इस व्रत को ‘संतान षष्ठी’ नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को विधि विधान के साथ किया जाता है। खासकर चैत्र, आश्विन और कार्तिक मास की षष्ठी को इस व्रत को आरंभ करने का प्रचलन अधिक है। स्कंद षष्ठी इस व्रत को धारण करने से होने वाले लाभ की विशेषता आप इसी लेख में जाने वाले हैं। अतः सभी जातक नीचे दी गई व्रत विधि तथा लाभ को  ध्यानपूर्वक पढ़ें।

आइये जानते है स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व क्या है 

स्कंद षष्ठी व्रत संतान की पीड़ा को दूर करने के लिए रखा जाता है। ऐसी मान्यताएं है। धार्मिक पौराणिक कथाओं के अनुसार स्कंद षष्ठी के अवसर पर शिव-पार्वती की पूजा के साथ ही स्कंद की पूजा की जाती है। स्कंद षष्ठी व्रत को महत्व के तौर पर दक्षिण भारत में अधिक तथा विधि विधान के साथ महत्व दिया जाता है।  खासकर तमिलनाडु में इस व्रत को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। दक्षिण भारत में कार्तिकेय को कुमार, स्कंद और मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है।

 दक्षिण भारत में इस व्रत को ‘संतान षष्ठी’ नाम से भी जाना जाता है। वहां की मान्यता है इस व्रत को धारण करने पर संतान के सभी प्रकार के दुखों का अंत हो जाता है। जिन जातकों को घर में परेशानी होती है और संतान सुख प्राप्त नहीं है। तथा संतान को किसी प्रकार की व्याधि है। ऐसे में कोई भी जातक इस व्रत को धारण कर सकता है। इस व्रत को रखना बहुत ही आसान है। तथा एक दिन पूर्व व्रत रख कर षष्ठी को कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

 स्कंद षष्ठी व्रत के लाभ

धार्मिक पौराणिक कथाओं के आधार पर तथा स्कंदपुराण के नारद-नारायण संवाद में इस व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है। इस व्रत को धारण करने से पुत्र की पीड़ा दूर होती है। तथा सभी दुखों का अंत होता है। इस व्रत का विशेष लाभ के रूप में च्यवन ऋषि को आंखों की ज्योति प्राप्त हुई थी। ऐसा पौराणिक कथा में देखा गया है। स्कंद षष्ठी की कृपा से प्रियव्रत का मृत शिशु जीवित हो गया था।

हिंदी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर स्कंद षष्ठी व्रत को स्वास्थ्य की दृष्टि से भी देखा जाता है। व्रत धारण करने वाले जातकों को स्वास्थ्य संबंधित जो भी कष्ट होते हैं उसने निश्चित तौर पर छुटकारा मिलता है। स्वास्थ्य संबंधी दुखों के निवारण के लिए ही इस व्रत को धारण किया जाता है। 

स्कन्द षष्ठी व्रत के दिन

12 महीने 

मुहूर्त

दिनांक 

जनवरी 

प्रारम्भ - 09:13 सुबह , जनवरी 18
समाप्त - 10:58 सुबह, जनवरी 19

सोमवार, जनवरी 18, 2021

फरवरी 

प्रारम्भ - 05:46 सुबह, फरवरी 17
समाप्त - 08:17 सुबह, फरवरी 18

बुधवार, फरवरी 17, 2021

मार्च 

प्रारम्भ - 02:09 सुबह, मार्च 19
समाप्त - 04:48 सुबह, मार्च 20

शुक्रवार, मार्च 19, 2021

अप्रैल 

प्रारम्भ - 08:32 शाम , अप्रैल 17
समाप्त - 10:34 शाम , अप्रैल 18

रविवार, अप्रैल 18, 2022  

मई 

प्रारम्भ - 11:34 ,सुबह मई 17
समाप्त - 12:32 शाम , मई 18

सोमवार, मई 17, 2021

जून 

प्रारम्भ - 10:56 शाम , जून 15
समाप्त - 10:45 शाम , जून 16

बुधवार, जून 16, 2021

जुलाई 

प्रारम्भ - 07:16 सुबह, जुलाई 15
समाप्त - 06:06 सुबह, जुलाई 16

बृहस्पतिवार, जुलाई 15, 2021

अगस्त 

प्रारम्भ - 01:42 शाम , अगस्त 13
समाप्त - 11:50 सुबह, अगस्त 14

शुक्रवार, अगस्त 13, 2021 

सितम्बर 

प्रारम्भ - 07:37 शाम , सितम्बर 11
समाप्त - 05:20 शाम , सितम्बर 12

 रविवार, सितम्बर 12, 2021

अक्टूबर 

प्रारम्भ - 02:14 ए एम, अक्टूबर 11
समाप्त - 11:50 शाम , अक्टूबर 11

सोमवार, अक्टूबर 11, 2021

नवम्बर 

प्रारम्भ - 10:35 सुबह, नवम्बर 09
समाप्त - 08:25 सुबह, नवम्बर 10

 मंगलवार, नवम्बर 9, 2021

दिसम्बर 

प्रारम्भ - 09:25 शाम , दिसम्बर 08
समाप्त - 07:53 शाम , दिसम्बर 09

बृहस्पतिवार, दिसम्बर 9, 2021 

स्कंद षष्ठी त्यौहार का महत्व

हर वर्ष स्कंद षष्ठी त्यौहार को दक्षिण भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है , स्कंद षष्ठी 2021 भी हर्षो उल्लास के साथ मनाया जायेगा इस दिन भगवान कार्तिकेय अर्थात श्री माता पार्वती के जेष्ठ पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती है। ये दक्षिण भारत के मुख्य त्योहारों में से एक है। इस दिन यहां लोग कार्तिकेय को मुरुगन नाम से पूजा करते हैं। धार्मिक पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस षष्ठी का उपवास रखने वाले जातकों को विशेष फलों की प्राप्ति होती है। इस व्रत को सुख समृद्धि का प्रभाव भी कहा जाता है। तथा इस छह दिवसीय उत्सव में सभी भक्त बड़ी संख्या में भगवान कार्तिकेय के मंदिरों में इकट्ठा होते हैं।  तथा भक्ति भाव से कार्तिकेय की पूजा करते हैं और व्रत धारण करते हैं।

 

स्कंद षष्ठी त्यौहार की पूजा विधि

वर्ष स्कंद षष्ठी 2021 बहुत्त ही शुभ घडी में है , षष्ठी के दिन श्रद्धालु व्रत धारण करते हैं। तथा भगवान मुरुगन का पाठ बड़े भक्ति भाव से करते हैं। भगवान मुरुगन के मंदिर में सुबह जाकर उनकी पूजा करने का विधान है। व्रत करने वाले श्रद्धालु इस दिन कुछ नहीं खाते और सिर्फ 1 दिन फलाहार लेते हैं। यह त्यौहार 6 दिन लगातार चलता है और जो जातक 6 दिन लगातार एक वक्त व्रत रखता है। उन्हें अभीष्ट फलों की प्राप्ति होती है।

स्कंद षष्ठी व्रत धारण करने वाले श्रद्धालु ‘ॐ तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात’ मंत्र का जाप करते हैं। इस मंत्र का जाप बहुत ही शुभ फलों की प्राप्ति करवाता है। इस व्रत को धारण करने वाले श्रद्धालुओं को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इस दिन किसी प्रकार के तामसी भोजन का उपभोग नहीं करना चाहिए। तथा इस दिन किसी से लड़ाई झगड़ा या अन्य प्रकार के तमोगुण को महत्व नहीं देना चाहिए। तथा सात्विक भोजन करते हुए सतोगुण को ही महत्व देना उचित रहता है।

जो श्रद्धालु आस्था और विश्वास के साथ स्कंद  त्यौहार के दिन व्रत रखता है। उसे भगवान शिव और पार्वती के साथ-साथ कार्तिकेय की विशेष कृपा निहित होती है।

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