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Somvati Amavasya | जाने सोमवती अमावस्या 2022 में कब है, कथा और महत्व

सोमवती अमावस्या 2022
June 24, 2021

जानिए सोमवती अमावस्या के दिन किए जाने वाले टोटके, साल 2022 में यह पर्व कब आएगा, पौराणिक कथा, इस दिन क्या करना चाहिए और हिंदू धर्म में  क्या महत्व है?

आइये जानते है सोमवती अमावस्या 2022 कब है ? सोमवती अमावस्या का दिन पूरे भारतवर्ष में मनाए जाने वाला पर्व है, यह दिवस भगवान शिव को अर्पित होता है। अमावस्या प्रत्येक माह में आती है जिसमें चंद्र देव के दर्शन नहीं हो पाते। वर्ष में आने वाली बारह अमावस्याओं का अपना महत्व होता है और प्रत्येक उत्सव को मनाए जाने के पीछे सर्व-मान्य पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई होती है। अमावसी के इस दिन से चंद्रमा के प्रकाश के पखवाड़े का आरंभ हो जाता है। इसलिए इसे चंद्रमा दिवस मानकर भी मनाया जाता है और साल में 12 बार अमावस्या की रात आती है।

हिंदू संस्कृति में अमावस्या के दिवस को अनुष्ठानों और परंपराओं का पालन करते हुए मनाया जाता है। अमावस्या की रात महीने में सबसे अधिक अंधकार से भरी हुई रात होती है। इसे वर्ष का सबसे प्रभावशाली समय माना जाता है इसलिए इस दिन की गई पूजा भी बहुत शुभ होती है। सोमवती अमावस्या के उत्सव पर भगवान शिव को व्रत द्वारा प्रसन्न किया जाता है। महिलाएं सोमवती अमावस्या के व्रत को अपने पति की दीघार्यु की कामना से रखती हैं। यह व्रत लिंग विशिष्ठ नहीं होता, इसे कोई व्यक्ति रख सकता है।

 

वर्ष 2022 में आने वाली सोमवती अमावस्या कब है? (Somvati Amavasya Kab Hai)

सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह बहुत पवित्र दिन होता है और संयोग से सोमवार के दिन अमावस्या होती है। सोमवार का दिन भगवान शिव का दिन माना जाता है। 

वर्ष 2022 में 30 मई को सोमवार के दिन सोमवती अमावस्या के पर्व को मनाया जाएगा।

साल 2022 में 29 मई को रविवार की दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर अमावस्या की तिथि आरंभ हो जाएगी और 30 मई को सोमवार की शाम 5 बजे सोमवती अमावस्या का समापन हो जाएगा। 

इस साल 2021 में 12 अप्रैल के दिन सोमवार को यह पवित्र अमावस्या का दिन आने वाला है। 

इस दिन की गई पूजा से नाकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं। भगवान शिव के उपासकों द्वारा बड़े स्तर पर यज्ञों का आयोजन किया जाता है। इस दिन की पूजा को अमावस्या तिथि के अनुसार ही मनाया जाना चाहिए। इस समय को हिंदू पंचांग के अनुसार बताया गया है। इस समय के बाद की गई पूजा सामान्य पूजा की भांति ही फलदायी होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्योदय साथ नए दिन का आरंभ होता है। इसलिए वर्तमान समय में प्रयोग किए जाने वाले कैलेंडर के हिसाब से यह दिन दो तिथियों के बीच की अवधि का होता है।

 

सोमवती अमावस्या की कथा (Somvati Amavasya Katha)

कथा के अनुसार एक ब्राह्मण परिवार था जिसमें सात बेटे और एक बेटी थी। सभी बेटों का विवाह हो चुका था लेकिन अभी तक बेटी की शादी नहीं हुई थी। इस कारण से ब्राह्मण और उसकी पत्नी काफी दुखी थे। एक साधु बहुधा उनके घर भिक्षा लेने आता रहता था। वह साधु सभी बहूओं और बेटों को सुखद जीवन का आशीर्वाद देता था, लेकिन उसकी बेटी के समय वह आशीर्वाद नहीं देता था। ऐसा देखकर उस ब्राह्मण ने अपनी बेटी की कुंडली को दिखाने का निर्णय लिया।

पंडित ने जब उस कन्या की कुंडली को देखा तो उसमें विवाह के अशुभ योग बने हुए थे। कन्या के इस योग के अनुसार यदि उसकी बेटी की शादी हो भी जाती है तो वह विधवा हो जाएगी। ऐसे में ज्योतिष शास्त्र के उस विद्वान ने बेटी से सिंघल नाम के द्वीप पर जाने को कहा और बताया कि वहां पर आपको एक धोबिन मिलेगी जोकि इसका उपाय आपको बता देगी। 

पंडित की आज्ञा का पालन करते हुए वह कन्या अपने भाई के साथ उस टापू तक पहुंचने के लिए यात्रा पर निकल गई। द्वीप तक पहुंचने का रास्ता जटिल था। रास्ते के दौरान कन्या को एक गिद्ध का घोंसला दिखाई दिया। उस घोंसले में गिद्ध के बच्चे थे। उस घोंसले के पास एक सांप घूम रहा था और कुछ ही समय में सांप घोंसले के पास जाने लगा। गिद्ध के बच्चों की जान को संकट में देख उस कन्या ने सांप को मार दिया। तब गिद्ध ने अपने बच्चों को सही हालात में पाकर उस कन्या को उस धोबिन के आवास तक पहुंचाया। इस रास्ते को तय करते समय उस कन्या ने पीपल के वृक्ष का पूजन भी किया। 

धोबिन के स्थान पर पहुंचने के बाद उस कन्या ने पूरी श्रद्धा भावना के साथ उसकी सेवा की और कन्या द्वारा की गई सेवा से धोबिन बहुत प्रसन्न हुई। उसके बाद कन्या को अशुभ योग से मुक्ति दिलाने के लिए उस धोबिन ने कन्या को सोमवती अमावस्या के व्रत को करने का आदेश दिया। कन्या ने धोबिन द्वारा बताए गए अनुष्ठानों का पालन करते हुए इस व्रत को पूरे विधि विधान से किया। जिसके बाद धोबिन ने उस कन्या के माथे पर सिंदूर लगाया, जिससे कि वह उस अशुभ योग से मुक्त हो गई।

 

सोमवती अमावस्या के दिन किए जाने वाले टोटके

  • नौकरी से संबंधित बाधाएं आने पर इस दिन ओंकार मंत्र का जाप करना चाहिए। इसी के साथ रात के समय रोटी पर सरसों का तेल लगाकर उसे काले कुत्ते को खिलाना चाहिए। इससे नौकरी मिलने में आने वाली और नौकरी के दौरान चल रही समस्याएं दूर हो जाती हैं। 
  • हजार गौ दान का फल प्राप्त करने के सोमवती अमावस्या के दिन मौन व्रत का पालन करना चाहिए। अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए पीपल के वृक्ष का पूजन कर उसने नीचे बैठ कर भगवान शंकर की आराधना करनी चाहिए।
  • धन धान्य की प्राप्ति के लिए पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करके उसे सूत लपेटने के उपरांत ब्राह्मणों को आदर सत्कार सहित भोजन कराना चाहिए। अंत में उनके पांव छूकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
  • यदि किसी जातक का धन व्यर्थ के खर्च में व्यय हो रहा हो तो इस दिन तुलसी मां की पूजा करनी चाहिए और श्री हरि के मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। पूजा के बाद तुलसी के पौधे की 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए।इस दिन शाम के समय उपले के ऊपर घी और गुड़ को लगाकर उसे जलाना चाहिए इसे धन लाभ होता है।
  • यदि किसी जातक को व्यापार में धन हानि हो रही हो तो उसे किसी कुएं में दूध का एक चम्मच डालकर पानी एक रुपए के सिक्के को डालना चाहिए। इससे व्यापार में लाभ होना आरंभ हो जाएगा। 
  • कालसर्प दोष से प्रभावित जातकों को इस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाकर बिल्वपत्र को अर्पित करना चाहिए। इसके बाद पूरा दिन भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। 
  • सुबह उठकर चांदी से बने नाग नागिन की पूजा के बाद उनकी प्रतिमा को बहते जल में विसर्जित करने से भी कालसर्प दोष का निवारण हो जाता है। 
  • पीपल के पेड़ पर घी का दिया जलाकर पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है।

सोमवती अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए

  • इस दिन पीपल के वृक्ष का पूजन करना चाहिए। माना जाता है करोड़ो देवी देवता पीपल के पेड़ में निवास करते हैं। सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस पेड़ का पूजन बहुत शुभ माना गया है। 
  • इस दिन यदि संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। यदि इन तीर्थ स्थानों पर जाना आपके लिए मुश्किल हो तो अपने स्नान करने वाले जल में गंगाजल को मिला लेना चाहिए। 
  • पीपल के वृक्ष के पूजन के बाद पीले रंग के पवित्र धागे को 108 बार परिक्रमा करके बांधना चाहिए। 
  • इस दिन शनि मंत्र का पाठ करना बहुत फलदायी होता है। 
  • इस दिन जरूरतमंदों और गरीबों को भोजन कराना चाहिए और उनको वस्त्र और धन का दान देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। जिससे पुण्य प्राप्त होता है और सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। 
  • पितृ तर्पण के लिए सोमवती अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है इसलिए दोपहर के समय पितरों की शांति के लिए पूजा करनी चाहिए।

सोमवती अमावस्या का महत्व  (Somvati Amavasya Ka Mahatva)

सोमवती अमावस्या का उत्सव हिंदुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। भारत में इस दिन भगवान शंकर की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। सभी भक्त भोलेनाथ जी का पूजन करते हैं और व्रत को पूरे अनुष्ठानों का पालन करके रखा जाता है। इस व्रत कथा को द्वापर युग में श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। कई क्षेत्रों में इस व्रत को बच्चों की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस दिन सुबह देर तक नहीं सोना चाहिए और यौन संबंधो को नहीं बनाना चाहिए।

शनिवार के दिन ही पीपल के पेड़ का स्पर्श करना चाहिए इसलिए सोमवार का दिन होने के कारण इस दिन पेड़ को स्पर्श करने से बचना चाहिए। यदि गलती से पीपल के वृक्ष को स्पर्श हो जाता है तो पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना के दौरान वृक्ष से क्षमा मांगनी चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए और शराब आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी कष्टों का नाश हो जाता है और आने वाली बाधाओं से जीवन मुक्त हो जाता है। गंगा स्नान के साथ-साथ अन्य पवित्र नदियों में किए गए स्नान का भी समान महत्व है। पितृ तर्पण के लिए अमावस्या का दिन बहुत उत्तम माना गया है, इस दिन पूर्वजों के आशीर्वाद और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजन किया जाता है। पितृ दोष से ग्रसित जातक इस दिन विशेष पूजा का आयोजन करते हैं। भगवान शिव के उपासकों के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है।

इस दिन की गई पूजा व आराधना से शिव शंकर बहुत शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हैं। इस दिन दान करना चाहिए, सोमवती अमावस्या के दिन किए गए दान से पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन शुभ कामों को किया जाता है जैसे कि गृह प्रवेश, नई वस्तु खरीदना या नया व्यवसाय करना आदि। 

 

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