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रवि योग 2021 में कब है, जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

रवि योग 2021
March 4, 2021

जानिए रवि योग 2021 में कब है, रवि योग का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

रवि योग 2021 – रवि योग अधिमानतः तब बनता है जब चंद्रमा सूर्य से चार नक्षत्रों के अंतराल पर होता है। वैदिक ज्योतिष के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस योग में सभी अशुभता को नष्ट करने की क्षमता है और कार्रवाई के एक सफल दिन की शुरुआत होती है। यह योग उस समय होता है जब चंद्रमा नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से 20, 13, 10, 9, 6 या 4 नक्षत्र की दूरी पर होता है। हिंदू चंद्र माह के अनुसार, यह एक विशिष्ट समय अवधि है, जिसमें कार की बुकिंग, दुकानों के खुलने, घर के सौदे को बंद करने, घर में नई कार लाने और साथ ही घर को गर्म करने जैसे विभिन्न समारोह करना शुभ होता है। ज्योतिषी बताते हैं कि रवि योग में सभी बुरे मुहूर्तों को समाप्त करने की क्षमता है।

कुछ स्थितियां हैं जब बृहस्पति और पुष्य एक साथ आते हैं; यदि यह संयोग गुरुवार को होता है, तो इसका नाम गुरु पुष्य योग है, और जब यह रविवार को होता है, तो इसका नाम रवि पुष्य योग है। समय की यह शुभ अवधि व्यक्ति द्वारा किए गए प्रत्येक कार्य / कार्य के लिए सफलता सुनिश्चित करती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पुष्य नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र के रूप में परिभाषित किया गया है; लोग इसे सभी नक्षत्रों का राजा भी कहते हैं। यह स्थिर माना जाता है, और इसलिए इस समय के दौरान किए गए काम में स्थिरता की समान भावना होती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रवि योग पर साधना या पूजा करना जीवन के लगभग हर पहलू के लिए सफलता सुनिश्चित करता है। यह कार्य की प्रभावशीलता और गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।

रवि योग का महत्व

यह बहुत शुभ और लाभदायक योग माना जाता है, यदि किसी व्यक्ति को कुछ अत्यधिक मूल्यवान कार्य करना है और उसे ऐसा करने के लिए कोई योग नहीं मिल रहा है, तो इस रवि योग के दौरान वह कार्य किया जा सकता है । माना जाता है कि यह कुंडली में अकेला ऐसा योग होता है जो अनेक अशुभ योगों को दूर कर देता है। दरअसल नवग्रहों के राजा सूर्य से संबंधित होने के कारण रवि योग बेहद प्रभावशाली बन जाता है। इस योग में जटिल आपरेशन आदि कार्यों में भी पूरी सफलता प्राप्त होती है। इस शुभ योग में आदित्य हृदयस्त्रोत का पाठ करना विशेष फलदायी रहता है। इस शुभ रवि योग के दिन सुबह सूर्यदेव की विधि विधान से पूजा कर उन्हें जल अर्पित करें।

वर्ष 2021 में कब है रवि योग

रवि योग के दिन

रवि योग का समय

मार्च 4, 2021, बृहस्पतिवार

01:36 AM से 06:48 AM

मार्च 4, 2021, बृहस्पतिवार

06:48 AM से 06:14 PM

मार्च 4, 2021, बृहस्पतिवार

11:58 AM से 06:47 AM, मार्च 05

मार्च 5, 2021, शुक्रवार

06:47 AM से 10:38 PM

मार्च 16, 2021, मंगलवार

04:44 AM से 06:35 AM

मार्च 16, 2021, मंगलवार

06:35 AM से 06:34 AM, मार्च 17

मार्च 17, 2021, बुधवार

06:34 AM से 07:31 AM

मार्च 18, 2021, बृहस्पतिवार

02:37 AM से 06:33 AM

मार्च 18, 2021, बृहस्पतिवार

06:33 AM से 10:35 AM

मार्च 19, 2021, शुक्रवार

01:44 AM से 06:31 AM, मार्च 20

मार्च 20, 2021, शनिवार

06:31 AM से 04:46 PM

मार्च 22, 2021, सोमवार

09:28 AM से 06:28 AM, मार्च 23

मार्च 23, 2021, मंगलवार

06:28 AM से 06:26 AM, मार्च 24

मार्च 24, 2021, बुधवार

06:26 AM से 11:12 PM

मार्च 26, 2021, शुक्रवार

09:40 AM से 06:23 AM, मार्च 27

मार्च 27, 2021, शनिवार

06:23 AM से 07:52 PM

रवि योग में पूजा विधि

रवि योग में सूर्य की पूजा महत्वपूर्ण होती है। सूर्य हमारे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र स्थान माना गया है | जिस किसी के कुंडली में सूर्य का साथ होता है वह हमेशा से अधिक भाग्यशाली और बलवान होता है। रवि योग वह लाभकारी योग है जिसमें किए गए सभी कार्य और अनुष्ठान सफलतापूर्वक पुरे होते है जिसके लाभ हमे आगे भी भविष्य में देखने को मिलते है। कहते है की रवि योग इतना प्रभावशाली होता है की यह जो भी बुरी और अशुभ प्रभावी शक्ति होती है वह उसे भी मात दे सकता है।

जिस दिन रवि योग होता है उस दिन लोग सूर्य देव लो पूजते है। कहा जाता है कि इस दिन किसी भी व्यक्ति को हताश नहीं होना पड़ता है क्योंकि इस योग में सभी कार्य और इच्छाएं पूरी होती हैं। यह भी कहा जाता है कि यदि इस शुभ मुहूर्त के दौरान सूर्य को जल, फूल, मूल आदि अर्पित किया जाता है, तो इससे बहुत लाभ होता है।

गाय की भी करें पूजा

रवि योग के दिन, यदि आप गाय की पूजा करते हैं, तो सभी ग्रह-नक्षत्र आपसे प्रसन्न होते हैं और आपको भाग्य का भी साथ मिलता है। इस दिन गाय को गीला गेहूं खिलाना चाहिए। ऐसा करने से लाभ के सभी द्वार आपके लिए पूरी तरह से से खुल जाते हैं। रवि योग के दिन इस मंत्र का जाप करना बहुत ही शुभ और प्रभावी माना जाता है । प्रातः काल स्नान करने के बाद इस मंत्र का जाप करें और साथ ही सूर्य देवता की पूजा करें। अगर आपकी कुंडली में सूर्य से संबंधित किसी भी प्रकार का दोष या पीड़ा है, तो रवि योग के समय आप अपनी कुंडली से इस बुरे प्रभाव को पूरी तरह से निकाल सकते हो।

 

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