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मीना संक्रांति 2021 कब है और इसका क्या का महत्व है

मीना संक्रांति 2021
February 26, 2021

जानियें  वर्ष 2021 में कब है मीना संक्रांति, आखिर इसे क्यों और कब मनाया जाता है और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है?

मीना संक्रांति 2021 – मीना संक्रांति हिंदुओं द्वारा मनाए जाने वाला बहुत प्रसिद्ध त्योहार है। वर्ष के प्रत्येक महीने में संक्राति आती है और प्रत्येक माह में आने वाली संक्रांति का अपना विशेष महत्व होता है। मीना संक्रांति भी इन 12 संक्रांतियों में से ही एक है। वर्ष के अंतिम माह में आने वाली संक्रांति को ही मीना संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मीन राशि का प्रभाव सूर्य पर पड़ता है। सूर्य का स्थान प्रत्येक महीने में बारह राशियों में बदलता रहता है और सूर्य के राशि में प्रवेश करने से संक्रांति का अनुमान लग जाता है।

भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में इसे मीन संक्रमण के नाम से भी बुलाया जाता है। इस दिन भूमि दान करने खुशहाल जीवन की प्राप्ति होती है। भूमि दान न कर सकने वाले लोग इस दिन अन्य दान करते हैं और ग़रीबों को खाना खिलाते हैं। पंजाब, केरल और तमिलनाडु राज्य में प्रत्येक माह के शुरूआत में मीना संक्रांति को मनाया जाता है।

 

मीना संक्रांति कब मनाई जाती है?

हिंदू समय के हिसाब से होली के बाद जब अंतिम माह की शुरूआत होती है और सूर्य का प्रवेश वाहरवीं राशि में होता है उस समय मीना संक्रांति को मनाया जाता है। यह मार्च की 14 तारीक के समीप ही आता है। वर्ष 2021 में भी यह 14 मार्च के दिन होगा और 2022, 2023 में 15 मार्च को मीना संक्रांति मनाई जाती है। वैदिक मंत्रों का उच्चारण करके पूजा पाठ के साथ इस दिन को मनाया जाता है।

 

आखिर क्यों मनाई जाती है मीना संक्रांति?

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के अंतिम माह का आरंभ मीना संक्रांति के पर्व के साथ हो जाता है। इसी दिन सूर्य 12वीं राशि मीन में प्रवेश कर अपनी अवस्था को बदल देता है। इसलिए इस दिन को मनाया जाता है। वहीं एक मान्यता अनुसार इसी दिन यमराज सावित्रि के पति सत्यवान को अपने साथ लेकर जा रहे थे क्योंकि उनकी दृष्टि से सत्यवान का मानव जीवन का समय पूरा हो गया था। उस समय सावित्रि अपने पति को यमराज से बचाकर अर्थात मौत के मुख से वापिस लेकर आई थी। इसी दिन शादीशुदा महिलाएं अपनी पति की रक्षा हुेत पीले रंग का कच्चा सूत बाँधकर रखती हैं और पूरा दिन उपवास रखती हैं। इसलिए इस दिन को सावित्रि नोम्बु के नाम से भी मनाया जाता है।

 

वर्ष 2021 में कब है यह तिथि और कब शुरू होंगे मुहूर्त समय?

वर्ष 2021 में 14 मार्च को रविवार के दिन यह पर्व मनाया जाएगा। इस दिन पुण्य प्राप्ति के लिए दान दिया जाता है। इस दिन मीन संक्रांति का क्षण शाम को 6 बजकर 18 मिनट पर होगा। यह क्षण मिनटों में या सेकंड में होता है।

पुण्यकाल का समय रविवार की शाम 6 बजकर 18 मिनट पर आरंभ होकर 6 बजकर 29 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार इसकी अवधि मात्र 11 मिनट की होगी। 

पुण्यकाल के साथ महापुण्य काल का ज्ञान होना भी बहुत आवश्यक है। इस वर्ष महापुण्य काल की अवधि भी 11 मिनट की होगी और यह भी पुण्यकाल के समय में शुरू होकर समाप्त हो जाएगा। 

मीना संक्रांति के साथ ही मलमाह का आरंभ हो जाता है इस मलमाह की अवधि में नामकरण, शादी से संबंधित कार्य, नई पढ़ाई में प्रवेश करना और गृह प्रवेश जैसे कार्यों से बचना चाहिए। इस समय धार्मिक दृष्टि से इन मांगलिक कार्याें को करना अशुभ माना जाता है। इस समय काल में दान करके सूर्य देव की अराधना में लग जाना चाहिए। सुबह के समय स्नान के उपरांत सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए और मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए। मलमाह के समय भगवान श्री विष्णु और महादेव की पूजा से बहुत लाभ होता है और आर्शीवाद की प्राप्ति होती है। सूर्य देव की अराधना से स्वास्थ्य ठीक रहता है और मन भी पवित्र हो जाता है। इस दिन गौ माता को भरपेट चारा खिलाना चाहिए।

 

मीना संक्रांति का महत्व

शास्त्रों में मीना संक्रांति का बहुत महत्व है और इसका विस्तार से उल्लेख देखने को मिलता है। व्यावहारिक रूप से इन दिन को बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह दिन शुभ और पवित्र नहीं माना गया है। अलग मान्यताओं और ग्रंथो के आधार पर प्रत्येक क्षेत्र में इसे अलग अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन के बाद से दिन का समय काल बढ़ जाता है और रातें छोटी हो जाती हैं। इसी दिन नए वातावरण की शुरूआत होती है जिसमें वायु भी पहले से साफ हो जाती है।

इस समय काल में देवताओं की अराधना करने, योग और ध्यान लगाने में बहुत आसानी हो जाती है। जिससे बुद्धि और तन मन की शुद्धि हो जाती है। पुण्यकाल के समय तीर्थ स्थानों में किए स्नान को बहुत ही शुभ माना गया है। मीना संक्रांति के समय रातों की अवधि के साथ नकारात्मक शक्तियां भी कम हो जाती है। सूर्य देवता की पूजा का इस दिन विशेष महत्व है।

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