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महाशिव रात्रि 2021 | महाशिव रात्रि कब है | महाशिव रात्रि की कथा और शुभ मुहूर्त | महाशिव रात्रि का महत्तव | Maha Shivratri 2021

महाशिव रात्रि 2021
March 6, 2021

महाशिव रात्रि क्यों मनाई जाती है, इसकी पौराणिक कथा और वर्ष 2021 में कब होगी?

महाशिव रात्रि 2021 – भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि के इस पर्व की सनातन धर्म में बहुत विशेषता है। महाशिवरात्रि को महादेव की महान रात भी कहा जाता है। भगवान शिव की पूजा के लिए यह पर्व बहुत ही उत्तम माना गया है। इस दिन को हिंदु धर्म में बहुत उत्साह से मनाया जाता है। पंचांग के आधार पर यह पर्व माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के समय में आता है। इस समय दिन रात भगवान शिव की अराधना की जाती है। इस दिन रखे जाने वाले व्रत और पूजा को कोई भी कर सकता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर भगवान शिव की चार प्रहर में पूजा की जाती है। जिसके शुभ मुहूर्त और पूजा के बारे में आपको विस्तार से बताएंगे।

अमावस्यान्त पंचांग के आधार पर महाशिवरात्रि माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है और पूर्णिमान्त पंचांग के अनुसार यह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। पूर्णिमान्त अर्थात उत्तर भारतीय और अमावस्यान्त यानि दक्षिण भारतीय पंचांग दोनों की गणना अनुसार यह पर्व समान दिन ही निकलता है। इसलिए अंग्रेजी कलैंडर की तिथि में कोई बदलाव नहीं होता, दिनांक वही रहती है। इस दिन की गई पूजा व हवन से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है और सुख की प्राप्ति होती है।

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? महाशिव रात्रि 2021

देवों के देव महादेव के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए यह महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का भी दिन होता है, जिनके कई देवियों के रूपों के बारे में आप जानते ही होंगे। महाशिवरात्रि का दिन वह शुभ समय होता है जब माता पार्वती और भगवान शिव दोनों की शक्तियां एक होती है जिससे उनका प्रभाव कई गुण बढ़ जाता है। माना जाता है कि इसी दिन ब्रह्माण्ड में आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह तेज गति से होता है।

एक कथा के अनुसार इस दिन भगवान अपने प्रचंड रूप में तांडव किया था, माना जाता है कि भगवान शिव का तांडव पूरी सृष्टि का विनाश करने की ताकत रखता है। उस दिन के बाद से इस दिन को  मनाया जाता है। वहीं दूसरी कथा की बात की जाए तो कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए अविवाहित कन्याएं अच्छे पति की प्राप्ति के लिए महाशिवरात्रि का व्रत रखती और विवाहित महिलाएं पति के कल्याण हेतु इस दिन को भजन करके मनाती हैं।

कुछ लोग अपने पिछले जन्मों के पापों का नाश कर मोक्ष प्रात्ति की कामना रखते हुए महाशिवरात्रि को मनाते हैं। इस महारात्रि के दिन किए हुए पूजन से कालसर्प दोष का निवारण होता है और कुंडली के अशुभ ग्रह भी शांत हो जाते हैं। चंद्रमा के बुरे प्रभाव को खत्म करने के लिए भी यह दिन काफी शुभ माना जाता है। चंद्रमा की खराब दृष्टि से व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है और धनलाभ भी नहीं हो पाता है। इसलिए ग्रहों के बुरे प्रभावों और दोष इत्यादि को खत्म करने लिए भी इस दिन को मनाते है और पूजा, पाठ व हवन करवाते हैं।

आइए जाने वर्ष 2021 के महाशिवरात्रि शुभ मुहूर्त -महाशिव रात्रि 2021

शुभ मुहूर्तों के बारे में जानने से पहले हम आपको बता दें कि वर्ष 2021 में 11 मार्च को बृहस्पतिवार के दिन महाशिवरात्रि का यह पर्व मनाया जाएगा। जिसमें इस दिन निशीथ काल पूजा की अवधि मात्र 48 मिनट की होगी। इस समय में की गई पूजा का विशेष महत्तव है, इस काल में की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं।

निशीथ काल पूजा का समय 11 मार्च की रात को 12 बजकर 6 मिनट 41 सेकेंड पर आरंभ हो जाएगा। जोकि 48 मिनट बाद 12 बजकर 55 मिनट 14 सेकेंड पर समाप्त हो जाएगा।

वहीं महाशिवरात्रि पारणा मुहूर्त 11 मार्च को शुक्रवार के दिन सुबह 6 बजकर 36 मिनट 6 सेकेंड पर शुरू होगा और शाम 3 बजकर 4 मिनट 32 सेकेंड तक रहेगा।

जैसा कि हमनें आपको बताया था कि महाशिवरात्रि के इस दिन में चार प्रहर पूजा का विधान है। शिव भक्त अपना पूरा दिन भगवान शिव की अराधना में समर्पित कर देते हैं और भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश में लगे रहते हैं। भगवान शिव के चार प्रहर की पूजा को शुभ मुहूर्त पर करने भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। प्रत्येक प्रहर की समाप्ति के बाद अगल प्रहर आरंभ हो जाता है।

पूजा शुभ मुहूर्त सारणी

इन चार प्रहर की पूजाओं का समय इस प्रकार हैः-

  1. प्रथम प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त 11 मार्च की शाम को 6 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

  2. द्वितीय प्रहर पूजा के शुभ मुहूर्त का आरंभ गुरुवार प्रथम प्रहर के खत्म होते ही रात 9 बजकर 29 पर हो जाएगा और 12 मार्च को रात 12 बजकर 31 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। 

  3. तृतीय प्रहर पूजा का समय शुक्रवार 12 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक है। 

  4. चतुर्थ प्रहर पूजा को आप रात के 3 बजकर 32 मिनट से सुबह 6 बजकर 34 मिनट के बीच में कर सकते हैं। 

महाशिवरात्रि के इस पर्व पर चतुर्दशी तिथि 11 मार्च को दोपहर 2ः39 से प्रारंभ होकर 12 मार्च को 3ः02 पर समाप्त हो जाएगी। इन शुभ मुहूर्तों केे समय को ध्यान में रखकर की गई पूजा से कई गुना ज्यादा फल की प्राप्ति होती है।

महा शिवरात्रि से संबंधित पौराणिक कथाएं 

महाशिवरात्रि के संबंधित कई कथन, मान्यताएं व कथाएं सुनने को मिलती है। जिनमें से कुछ कथाओं के बारे में बताने जा रहें हैं।

  • पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने की चाह से कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। जिसके चलते उन्होंने सभी सांसारिक मोह का त्याग कर दिया था। काफी समय की घनघोर तपस्या के बाद उनको भगवान शिव के दर्शन हुए थे। आखिर में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के समय ही भगवान शिव और माता पार्वती का यह शुभ विवाह हुआ था। इसी कारण से इस दिन को बहुत पवित्र माना जाता है और महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
  • गुरुड़ पुराण में निषादराज नाम से एक व्यक्ति से संबंधित कथा का उल्लेख भी है जिसमें गलती से वह शिवलिंग पर जल व बिल्व पत्र को चढ़ा देता है और गलती से शिवलिंग को प्रमाण कर देता है। भगवान शिव गलती से की हुई पूजा से ही बहुत प्रसन्न हो जाते हैं।
  • वहीं कुछ लोग भगवान शिव का जन्मदिन मान कर महाशिवरात्रि को मनाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिवलिंग के रूप प्रकट हुए थे। वैसे तो भगवान शिव का जन्म एक प्रकार का रहस्यमयी प्रश्न माना जाता है, जिसका पूर्ण उत्तर आज तक नहीं मिल पाया है। यह भी माना जाता है कि इस दिन ब्राह्मांड की रक्षा के लिए भगवान शिव ने समुद्र मंथन में निकला विष पिया था। तभी से इनको नील कंठ भी कहा जाने लगा।

महाशिव रात्रि का महत्व – महाशिव रात्रि 2021

महाशिवरात्रि का हिंदु धर्म में बहुत महत्तव है। वर्ष के प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी के समय को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है, लेकिन फाल्गुन माह की चतुर्दशी के समय आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के नाम से मनाया जाता है। इस दिन से संबंधित कई कथाओं का उल्लेख हमारे पुराणों में देखने को मिल जाता है। भगवान शिव ने इस दिन अपने शत्रुओं का नाश कर विजय प्राप्त की थी, कुछ लोग महाशिवरात्रि को इस दिन के रूप में देखते हैं।

भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से इस दिन हुआ था, कुछ लोग इस मान्यता के आधार पर इस पर्व को मनाते हैं। आधयात्मिक मार्ग पर तत्पर व्यक्तियों के लिए यह दिन बहुत विशेष होता है। इसकी पूजा को पूरे विधि विधान से करना चाहिए। बड़ी पूजा में आपको पुजारी व ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों की सहायता से ही पूजा हवन करना चाहिए। बिना फल की आशा से की गई पूजा से जितना फल मिलता है उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

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