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हनुमान जयंती 2021 | जयंती कब है, क्यों मनाई जाती है और महत्व | Hanuman Jayanti 2021

हनुमान जयंती 2021
March 20, 2021

हनुमान जयंती 2021 | जानिए हनुमान जयंती को किस समय मनाया जाता है, इसे क्यों मनाया जाता है और हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान जयंती 2021 – भगवान हनुमान को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे कि केसरीनंदन, आंजयान, पवनपुत्र, महावीर, हनूमत, मारुतात्मज, तत्वज्ञानप्रद आदि। प्रत्येक नाम का अर्थ अलग अलग है। हिंदु धर्म के अनुपम महाकाव्य रामायण में इनके बारे में विशेष रूप से सुनने को मिलता है। जिसमें हनुमान जी ने महान भक्त की परिभाषा का उल्लेख दिया है। हनुमान जयंती के दिन ही इनका जन्म पृथ्वी पर हुआ था। संकटमोचन के नाम से इनको इसलिए बुलाया जाता है क्योंकि इनके भक्त अच्छे और बुरे समय में इनकी अराधना करते हैं। इस दिन शोभायात्रा का आयोजन भी किया जाता है। लोग मंदिरों में जाकर इनकी पूजा करते हैं और पूरे दिन विधि विधान से इनके लिए व्रत रखते हैं। इनकी पूजा और व्रत मात्र से सारे दुख खत्म हो जाते हैं।

इनको भगवान शिव का अवतार माना जाता है। इनकी भक्ति के कारण इस दिन भगवान राम और सीता की पूजा का भी विशेष महत्तव है। इसके अलावा इस दिन सुंदर काण्ड का पाठ करने पर हनुमान जी बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते है। इस दिन हनुमान चालीसा जरूर पड़ना चाहिए और पूजा के बाद आरती करनी चाहिए। गरुड़ के समान वेगमान, पहाड़ों को आसानी से हिला सकने बाले हनुमान जी दिव्य शक्तियों के स्वामी हैं। इनको बल, वुद्धि और विद्या का देेव माना गया है। इनके आर्शीवाद प्राप्ति से मनुष्य बलशाली और तेेज वृद्धि वाला बन जाता है। हिंदुओं के यह बहुत प्रिय भगवान है। कहा जाता है कलयुग के समय में इनकी पूजा से हर इच्छा पूर्ण हो जाती है। आगे हम आपको बताएंगे कि कब हनुमान जयंती को मनाया जाता है और 2021 में पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? आइए जानते हैं कि इसे क्यों मनाया जाता है और हिंदु धर्म में इस पर्व का क्या महत्तव है?

 

हनुमान जयंती को कब मनाई जाती है – (Hanuman Jayanti Kab hai )

वानर भगवान के नाम से विख्यात हनुमान बजरंगबली के जन्मदिन के रूप में यह दिन मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन आता है। माना जाता है कि सूर्याेदय के समय इनका जन्म हुआ था, इसलिए सूर्यउदय के पूर्व इनके आध्यात्मिक प्रवचन शुरू हो जाते हैं और हनुमान जयंती के सूर्यउदय के बाद प्रवचन का समापन कर दिया जाता है। रामभक्त हनुमान को समर्पित यह शुभ दिन उत्तर भारत में बहुत श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। अलग अलग स्थानों पर इस पर्व को मनाने का समय भिन्न हो सकता है लेकिन इसको मनाने के पीछे भक्तों का तर्क एक ही होता है। उदाहरण के तौर पर, भारत के राज्य आंध्र प्रदेश में यह उत्सव पूरे 41 दिनों तक चलता है और चैत्र पूर्णिमा से वैशाह माह में कृष्ण पक्ष के दसवें दिन तक चलता है, जिसमें भक्त दीक्षा का पालन करते नज़र आते हैं। वहीं तमिलनाडु में हनूमथ जयंती के नाम से इसके अनुष्ठान किए जाते हैं।

 

हनुमान जयंती को क्यों मनाया जाता है?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार माता अंजना की कोख से हनुमान जी ने भगवान शिव के 11वें अवतार के रूप में जन्म लिया था। इनकी पूजा व अराधना करने से भय खत्म हो जाते हैं और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के परम भक्त थे। इस दिन के उपरांत कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भी इनका जन्मदिन माना गया है। हिंदु पंचांग के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा को इसे उत्तर भारत के लोग ज्यादा शुभ मानते हैं। लोग इनको वरूण कहकर भी पूजते हैं। भूत प्रेत की बाधा जीवन में न आए इस कामना के साथ भी मनाया जाता है। 

पौराणिक कथाओं की बात करें तो शनि के बुरे प्रभाव को खत्म करने के लिए भी दिन उचित माना गया है। एक समय में हनुमान जी ने शनि देव का घमंड तोड़ दिया था, जिससे प्रसन्न होकर उन्होंने हनुमान जी को वचन दे दिया था कि जो कोई भी सच्चे मन से तुम्हारी पूजा करेगा। उसकी राशि पर मेरा बुरा प्रभाव नहीं आएगा। इसलिए हनुमान जयंती को हनुमान जी की प्रतिमा पर तेल, सिंदूर और टीका चढ़ाकर इस पर्व को मनाया जाता है।

हनुमान जयंती की कथा – हनुमान जयंती 2021 

वहीं दूसरी कथा हनुमान के अमरता के वरदान से संबंधित है। भगवान हनुमान जी बचपन से ही जिज्ञासु किस्म के इंसान थे। एक समय की बात है जब सीता माता अपनी मांग में सिंदूर लगा रहीं थी, जिसे देखकर हनुमान जी के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उन्होंने माता से पूछ ही लिया कि वह सिंदूर को क्यों अपनी मांग में लगा रही हैं। तब माता ने बताया कि मैं अपने पति श्री राम की लंबी आयु और सौभाग्य वृद्धि के लिए इसे अपनी मांग में लगा रही हूं। भगवान श्री राम के परमभक्त हनुमान जी के मन में ख्याल आया कि अगर माता के एक चुटकी सिंदूर से प्रभु श्री राम जी की आयु और सौभाग्य में बढ़ोतरी होगी, तो क्यों न मैं पूरे तन पर ही इसे लगा लूं। उन्होंने ऐसा ही किया। अपने प्रभु के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण भावना को देखकर सीता माता बहुत खुश हुई और हनुमान को अमरता का वरदान दे दिया। इसलिए इस दिन को जयंती की तरह मनाया जाता है और इसी कारण से हनुमान जी सिंदूर चढ़ाने और हनुमान चालीसा पढ़ने पर खुश हो जाते हैं। 

एक मान्यता में बताया गया है कि जब बाल हनुमान का जन्म अंजनि के गर्भ से हुआ तो उनको बहुत तेज भूख लगी थी। उन्होंने सूर्य के लाल रंग के कारण उसे फल समझ लिया और खाने के लिए सूर्य की ओर निकल गए थे। उसी दिन राहु भी सूर्य को क्षति पहुंचाने के लिए आया हुआ था। राहु के पराजित होकर चले  जाने के बाद ही हनुमान जी वहां पहुंच गए। सूर्य देव ने राहु की भांति उनको दुष्ट समझकर वज्र से प्रहार कर दिया था। जिससे की ठोड़ी पर चोट लगने के कारण वह बुरी तरह जख्मी हो गए। इसी कारण से उनका मुख भी वानर की भांति थोड़ा टेड़ा हो गया था। तभी से उनका नाम हनुमान पड़ा था। इसलिए पवन पुत्र हनुमान को समर्पित यह दिन हनुमान जयंती के पर्व के नाम से मनाया जाता है।

 

वर्ष 2021 में हनुमान जयंती का मुहूर्त

 

इस साल पूर्णिमा 26 अप्रैल को सोमवार के दिन 12 बजकर 46 मिनट 12 सेकेंड पर आरंभ हो जाएगी और अगले दिन मंगलवार को 09 बजकर 03 मिनट 15 सेकेंड पर समाप्त हो जाएगी।

 

इस समय में की गई पूजा को माना जाता है कि वह हनुमान जयंती पर की गई है। इसके बाद पूर्णिमा का पवित्र समय समाप्त हो जाता है जोकि अगले वर्ष आता है। इस दिन सुबह उठकर राम सीता और हनुमान की ओर ध्यान लगा कर उठना चाहिए और सोने से पहले भी उनकी अराधना करनी चाहिए। स्नान के बाद गंगा जल हाथ में लेकर व्रत को शुरू करना चाहिए। अगर संभव हो तो पूजा के समय लाल या पीले रंग की धोती पहनें। लाल आसन पर बैठकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके जाप करना बहुत शुभ माना गया है। उसके बाद प्रतिमा को स्थापित करके विन्रम भाव से पूजा करनी चाहिए। सरसों के तेल का दीपक और धूप जलाना चाहिए। अंत में षोडशोपाचार की विधि से हनुमान की पूजा को आगे बढ़ना चाहिए। इसकी ज्यादा जानकारी के लिए आप पुजारी की सहायता ले सकते हैं या किसी ज्योतिष शास्त्र के विद्वान से परामर्श कर सकते हैं। 

हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का महत्व

पूरे भारतवर्ष में इसका विशेष महत्तव है, इस दिन भक्त पूरा दिन हनुमान चालीसा का जाप करते हुए हनुमान जी की अराधना करते हैं और उनके लिए व्रत रखते हैं। उत्तरी भारत इस दिन का बहुत महत्तव है, वहां के लोग हनुमान जयंती के साथ साथ प्रत्येक मंगलवार को भगवान हनुमान की विशेष पूजा करते हैं। मंगलवार का दिन हवन डालने के लिए सही नहीं माना जाता है, इसलिए इस दिन भक्त पूजा व्रत आदि रखते हैं और हवन नहीं डालते। इस दिन लोग नमक ग्रहण नहीं करते हैं। इस दिन यदि मीठा दान में दिया जाए तो उसे भी नहीं लेते हैं। वहीं इस दिन लोग तामसिक आहार मांस मदिरा का बिल्कुल भी सेवन नहीं करते हैं। इस दिन ऐसा करने से बहुत बुरे परिणाम सामने आते हैं। इसके अलावा हनुमान जी को गेहूं और गुड़ या इससे बने पकवान भगवान हनुमान जी को बहुत प्रिय हैं।

हनुमान जयंती के दिन पांच या ग्यारह बार किया गया हनुमान चालीसा का पाठ पवनपुत्र को बहुत जल्दी प्रसन्न कर देने वाला होता है। इससे सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

 इस दिन विशेष रूप से हनुमान मंदिरों को सजाया जाता है और भंडारो का आयोजन भी किया जाता है। इसी के साथ कई जगहोें पर तो मेला भी होता है। हर दिशा में हनुमान जी का गुण गान सुनने कोे मिलता है। हनुमान जी को खुश करने के लिए सिंदूर चढ़ाया जाता है, भजन कीर्तन किए जाते हैं और कहीं सुंदर कांड का पाठ किया जाता है। यह दिन सनातन धर्म में बहुत महत्तव रखता है। भगवान ने अपना जीवन बाल ब्रह्मचारी बनकर व्यतीत किया था, इसलिए स्त्रियों से दूरी बनाकर ही रखते थे। इसलिए महिलाएं इनको पैरों में दीपक जलाकर रख देती हैं। पूजा के समय न तो महिलाओं द्वारा वस्त्र चढ़ाना ठीक होता है और महिलाओं को इनको स्पर्श करने से भी बचना चाहिए। भगवान शिव का रूप माने जाने वाले हनुमान जी भक्तों की भूत पिशाच से रक्षा करते हैं और उनके कष्टों और पीड़ा को नष्ट कर देते हैं। हमे इस दिन बिना फल की इच्छा रखते हुए हनुमान जी के इस पर्व को मनाना चाहिए।

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