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गणगौर 2021 | गणगौर की कथा | गणगौर त्योहार का महत्व व मुहूर्त | Gangaur 2021 | आइयें जानते है गणगौर कब है

गणगौर 2021
February 20, 2021

जानिए क्या है गणगौर त्योहार, किस वजह से इसे मनाया जाता है, पढ़े इसकी पौराणिक कहानी, वर्ष 2021 में कब आने वाला है, गणगौर पर्व के मुहूर्त और जानें इसके महत्व के बारे में

गणगौर 2021– राजस्थान और मध्यप्रदेश में गणगौर उत्सव को स्थानीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। सोलह दिन तक चलने वाले इस पर्व को चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के तीज से समय मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर वैवाहिक महिलाएं और कन्याएं भगवान शिव पार्वती के अवतार गौरी की अराधना करते हैं। गौरी की पूजा के समय दूब के छींटे देते हुए श्रद्धालु गोर गोर गोमती गीत का गान करते हैं। वैवाहिक  औरतें अपने पति की लंबी आयु के लिए इस दिन व्रत रखती हैं और कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखकर भगवान शिव की अराधना करती हैं।

यह लोक गीत इस पर्व की आत्मा मानें जाते हैं। पूजा के समाप्त होने पर परिजनों के नामों का उच्चारण किया जाता हैं और पर्व में गवरजा, ईसर से बड़ी दीदी और जीजा जी के रूप की गीतों द्वारा पूजा की जाती है। राजस्थान में इसे रस्म के रूप में माना गया है, इसलिए इसकी पूजा को वैवाहिक जीवन के लिए अनिवार्य माना जाता है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलावा हरियाणा और गुजरात में गौरी तृतीया का पर्व बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है और इसे गणगौर कहा जाता है।

 

गणगौर क्यों मनाई जाती है ?- गणगौर 2021 

शादीशुदा महिलाओं और कन्याओं द्वारा विशेष रूप से यह त्योहार मनाया जाता है। दोनों ही बहुत विधि विधान से इस पूजा और पाठ को करके अपने पति के लिए इस व्रत को रखती हैं। कन्याएं भगवान शिव और पार्वती के पूजन से अपने पति के लिए लंबी आयु और समृद्धि के लिए यह त्योहार पूरी श्रद्धा भावना के साथ मनाती हैं। इस दिन के समय औरतें सोलह श्रृंगार करके लाल रंग के वस्त्र धारण करके इस पर्व को मनाकर भगवान शिव और पार्वती को प्रसन्न करती हैं। 

 

जानें गणगौर की ऐतिहासिक पौराणिक कहानी

कथा के अनुसार एक समय की बात है जब भगवान शिव और माता पार्वती वन में गए थे और माता पार्वती को प्यास लगी। नदी के पास जाकर माता ने जैसे ही पानी की अंजली भरी तो उनके हाथ में दूब का गुच्छा आया, दूसरी बार टेसू के फूल और तीसरी बार ढोकला नाम का फल आया। यह देखने पर माता को कुछ समझ नहीं आया तभी शिव जी ने बताया की आज चैत्र माह की तीज का दिन है। इस दिन गौरी पूजा से समय जो सामग्री आपको अर्पित की गई है वह इस नदी में बहकर आप तक पहुंच रही है।

तब पार्वती ने अपने स्वामी से कहा कि आप मेरे लिए नगरी बनवा दीजिए, मैं उस नगरी में सारी स्त्रियां गणगौर का व्रत करेंगी। तब माता को याद आया मैं तो पहले ही इनको सुहाग की रक्षा का वरदान दे चुकी हूं। तब उन्होंने महादेव जी से विनती करते हुए कहा कि आप इनको सौभाग्य का वरदान दीजिए प्रभु। तब भगवान ने अपनी पार्वती की बात मानकर अपना आर्शीवाद दे दिया था।

 

वर्ष 2021 में गणगौर पर्व का शुभ मुहूर्त

सौभाग्य तीज के नाम से प्रसिद्ध यह त्योहार साल 2021 में 15 अप्रैल के दिन मनाया जाएगा। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत शुभ माना गया है। गौरी और इस्सार की मूर्तियों जो जिस समय पानी में प्रवाहित किया जाता है, उस दिन को इसका अंतिम दिन माना गया है और इससे आपको गणगौर त्योहार के समापन का पता चल जाता है। इस पर्व के दिन गुरूवार होगा लेकिन 29 मार्च से 15 अप्रैल तक गौरी की पूजा की जाएगी।

साल 2021 की 14 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर तृतीया तिथि का शुभारंभ हो जाएगा और इस पवित्र तृतीया तिथि का समापन अगले दिन 15 अप्रैल को दोपहर 03 बजकर 27 मिनट पर होगा।

हिंदू पंचांग में सूर्योदय के साथ अगला दिन आरंभ होता है और सूर्यास्त के उपरांत उस दिन की समाप्ति भी हो जाती है। हिंदू पंचांग के आधार पर समय की गणना करके आपको अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से समय बताया जा रहा है।

 

क्या है गणगौर त्योहार का महत्व?

सनातन धर्म में तीज का दिन बहुत विशेष माना गया है, इस दिन को भगवान शिव और पार्वती के प्रेम को याद रखते हुए याद किया जाता है और विवाह दिवस के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जब माता पार्वती भगवान शिव से अलग हो गई थी इसी दिन के समय पुन पार्वती वापिस भगवान शिव के जीवन में आ गई थी। औरतें भी इस दिन पति की दीर्घायु की कामना करती हैं और माना जाता है इस दिन पुराने मन मुटाव खत्म हो जाते हैं, जिससे रिश्ते में पहले से और भी गहरा हो जाता है। गौरी पूजा करते समय औरतें सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ साथ पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। 

वहीं कुवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत और पूजा करते समय पूरे दिन शिव और पार्वती की अराधना करती हैं। इस दिन की गई पूजा से कन्याओं को एक आदर्श जीवन साथी की प्राप्ति होती है। इस गौरी तीज के दिन विधि विधान से पूजा करके बहुत शीर्घता से आर्शीवाद मिलता है जिससे जीवन खुशी और समृद्धि के साथ साथ जीवन साथी की आयु भी बढ़ जाती है। स्त्रियों व कन्याओं के लिए यह दिन बहुत महत्व रखता है।

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