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2021 में दिवाली कब है ? दिवाली महूरत 2021 |आइए जानते हैं की क्यों इस त्योहार को मनाया जाता है

Diwali 2021 का शुभ मुहूर्त - Astroupdate.com
February 5, 2021

आइए जानते हैं कि 2021 में दिवाली कब है, क्यों इस त्योहार को मनाया जाता है, धनतेरस और लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और दिवाली का हमारे हिंदू धर्म के लिए क्या महत्त्व है।

दिवाली को भारत का सबसे प्रसिद्ध पर्व माना जाता है और यह कार्तिक मास की अमवस्या की रात को मनाया जाता है। इससे 20 दिन पूर्व दशहरा मनाया जाता है, जिसके बाद से लोग बेसब्री से दिनों को गिनना शुरू कर देते हैं। पूरे पांच दिनों तक चलने वाला यह त्योहार भाई दूज तक चलता है और धनतेरस से शुरू हो जाता है। दिवाली को दिपावली के नाम से भी जाना जाता है जिसका संधि विच्छेद करने पर अर्थ है दीपक और आवली यानि पंक्ति। इसलिए इसे दीपों का त्योहार भी कहा जाता है और इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। हर साल यह त्योहार अक्टूबर या नवंबर माह में आता है। हिन्दू केलिन्डर के अनुसार दिवाली महूरत 2021 (Diwali Mahurat 2021)में यह त्योहार 4 नवंबर को गुरूवार के दिन मनाया जाएगा।  

दिवाली हिंदू धर्म के बड़े त्योहारों में से एक है और मात्र हिंदू ही नहीं जैन, बौद्ध और सिक्ख धर्म का अनुसरण करने वाले लोग भी दिवाली को बहुत धूमधाम से मनाते हैं। यह बात अलग है कि उनके इस त्योहार को मनाने का कारण अलग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दिवाली के दिन श्री राम के वनवास से वापिस आने के अलावा और भी कई घटनाएँ घटित हुई थी। जिसके बारे में हम आपको विस्तार से बताएंगे। यह दिन किसी भी अच्छे कार्य की शुरूआत करने के लिए शुभ माना जाता है लेकिन ज्यादा अच्छे परिणाम तथा फल की प्राप्ती के लिए ज्योतिषी द्वारा दिए हुए समय पर ही कार्य को आरंभ करें। इसी तरह प्रत्येक पूजा को करने का भी एक समय होता है जिसमें ग्रहों की बनी हुई स्थिति एवं लग्न दोगुना या उससे भी ज्यादा लाभ देते हैं। 

आखिर क्यों मनायी जाती है दीपावली – दिवाली का महत्व 

इस कथा के बारे में प्रत्येक भारतीय को पता ही होगा कि हिंदू धर्म में भगवान राम के वनवास काट कर अयोध्या वापिस लौटने की खुशी में अयोध्या वासियों नें घी के दीपक जलाए थे, तभी से इस दिन को दिवाली के रूप में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। यह कार्तिक मास का अमावस्या का ही दिन था। इस दिन भगवान श्री राम ने 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अथवा लंकापति रावण को मार कर अपनी अयोध्या नगरी में प्रवेश किया था। 

इसके अलावा एक और कथा का वर्णन हमें सुनने को मिलता है, हो सकता है कि आपने इसके बारे में न सुना हो। यह कथा नरकासुर नाम के राक्षस से संबंधित है जिसमें बताया गया है कि एक समय में सभी देवी-देवता, साधु और लोग इस राक्षस की दैवीय शक्तियों के दुरुपयोग से बहुत परेशान थे। यही नहीं बल्कि 16 हजार से अधिक स्त्रियों को इसने बंदी बना कर रखा हुआ था। तो भक्तों एवं देवताओं की पुकार सुनकर श्री कृष्ण ने इस नरकासुर नामक राक्षस का संपूर्ण नाश कर दिया था। उस दिन सभी ने उस राक्षस से मुक्ति पानेे की खुशी में अपने-अपने घरों में घी के दीपक जलाए थे। तब से यह दिन दिवाली के रूप में मनाया जाने लगा। 

इसी दिन विष्णु भगवान ने पाताल लोक को राजा महाबली के हाथ सौंप दिया था जिससे स्वर्ग लोक सुरक्षित होकर इंद्र के पास चला गया था और इंद्र ने इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया था। 

सिक्ख धर्म के लोग इस दिन को इस लिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन अमृतसर में सन 1577 को स्वर्ण मंदिर का कार्य शुरू किया गया था। स्वर्ण मंदिर सिक्खों के बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है। ग्वालियर के किले में बंद सिखों के 6वें गुरू गोविंद सिंह को इसी दिन आजाद किया गया था। मुगल बादशाह जहांगीर ने उनको बंदी बना के किले में रखा हुआ था। लेकिन जब उनको सपनों उन्हें छोड़ने के आदेश मिलने लगे और राज्य में परेशानियां बढ़ने लगी, तब जाकर जहांगीर को उसकी की हुई गलती का ऐहसास हुआ था। अंत में उन्होंने गुरू गोविंद सिंह को आदरपूर्वक रिहा किया। तब से यह दिन सिक्ख समुदाय के लोगों के लिए पवित्र दिन बन गया।

सतयुग में समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी और धन्वंतरि ने प्रकट हो अपने अमूल्य दर्शन भी इसी दिन ही दिए थे। तब से इस दिन को पवित्र और भाग्यशाली माना जाता है। पांडवों का भी दिवाली से संबंध बताया जाता है कि इसी दिन पांडव 13 साल का वनवास पूरा करके वापिस लौटे थेे।

धनतेरस 2021 पूजन का शुभ मुहूर्त और कुछ विशेष बातें – Diwali 2021

कुबेर देवता और धन्वंतरि देवता की पूजा से यह दिवाली का त्योहार आरंभ हो जाता हैै और पूरे पांच दिनों तक चलता रहता है। भगवान विष्णु जी ने इस धरती पर कई रूपों में अवतार लिया हुआ है। वैसे देवता धन्वंतरि को भी उन्हीं के रूप में पूजा जाता है और इनको आरोग्य का देवता माना जाता है। इस देवता की पीतल पसंदीदा धातु है इसलिए ही धनतेरस के दिन धातु का सामान खरीदा व बेचा जाता है। पीतल धातु की ख़रीददारी करना धनतेरस पर बहुत शुभ माना जाता है। समुद्र मंथन के समय पर यह पानी के अंदर से प्रकट हुए थे और इनके हाथ में एक कलश था। इसीलिए इनकी तस्वीर और प्रतिमा में यह हाथ में कलश लिए खड़े रहते हैं। कुबेर देवता को धन के देवता के रूप में पूजा जाता है। इन देवताओं की पूजा दिवाली के दो दिन पूर्व की जाती है। 

इसके अलावा यम देव की पूजा भी इसी दिन की जाती है जिसके बारे में ज्यादा तर लोग नहीं जानते होंगे। ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण दिशा की तरफ दीए का मुंह रखकर जलाने से व्यक्ति के अंदर से अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है। आधी रात हो जाने के बाद यम देवता की पूजा की जाती है और यह धनतेरस के दिन से संबंधित पूजा है। इस पूजा में जिस दीए का प्रयोग होता है उसके चार मुंह होते हैं और उसे चैमुखी दीया कहा जाता है। कुबेर पूजन धन धान्य की कमी नहीं होने देता है।

कृष्णा पक्ष की त्रयोश्र्चदी में यह मनाया जाता है। वर्ष 2021 में 2 नवंबर मंगलवार की शाम को 6 बजकर 18 मिनट पर धनतेरस का शुभ मुहूर्त आरंभ हो जाएगा जो 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। 

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त  2021 और ध्यान रखने योग्य बातें – Diwali 2021 Mahurat

कार्तिक मास की अमावस्या के दिन, महालक्ष्मी पूजन का उचित समय प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद का होता है। प्रदोष काल का यह समय पूजा का कई गुना ज्यादा फल देने वाला होता है, इस मुहूर्त काल में विधि विधान से करी हुई पूजा से घर और कारोबार की जगह में लक्ष्मी का बास हो जाता है। जिससे घर में धन का आना बना रहता है और कारोबार में धन लाभ होता है। इस लगन में की गई पूजा से महालक्ष्मी का अंश पूजा किए हुए स्थान में रूक जाता है जिससे आप और आपके परिवार पर माता का आशीर्वाद बना रहता हेै। 

लक्ष्मी माता की पूजा शाम या रात के समय ही शुरू की जाती है। गणेश पूजन से इस पूजा की शुरूआत होती है और मध्य में सरस्वती माता को भी पूजा जाता है। इसके उपरांत काली माता जी की पूजा के लिए महानिशीध काल का मूहुर्त एकदम उचित है। यह मुहूर्त रात्रि के मध्य में आता है और इस समय में की गई पूजा से काली माता जी बहुत खुश होती है। तांत्रिक पूजा के लिए महानिशीध काल को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

दिवाली महूरत 2021

इस दिवाली का लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त 2021 4 नवंबर गुरूवार की शाम को 6 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो जाएगा और 8 बजकर 6 मिनट तक बना रहेगा। इसी के साथ 1 घंटा 55 की इसकी अवधि रहेगी। 

प्रदोष काल का समय शाम 05ः34 से रात 08ः10 तक रहेगा और वृषभ काल का समय शाम 06ः10 से रात 08ः06 तक रहेगा।

दीपावली का हिंदू धर्म में महत्त्व – दिवाली महूरत 2021 , दिवाली का महत्व , दिवाली 2021 कब है 

भारत को धार्मिक त्योहारों का देश भी कहा जाता है। यहां त्योहारों को बहुत पवित्र माना जाता है क्योंकि यह दिन किसी न किसी पुरानी धार्मिक कथाओं से जुड़े होते हैं। यह पर्व  अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश अपने साथ लेकर आते हैं और हमें मिलजुल कर रहना  सिखाते हैं। दिवाली के दिन बनी हुई ग्रहों की अवस्था और असाधारण योग पूरे मानव समाज के लिए बहुत लाभदायक होते है। ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से आप यह साफ-साफ देख सकते हैं। तभी ज्यादातर लोग इस दिन चीजों को खरीदकर अपने-अपने घर लाते हैं। इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपना प्रभाव नक्षत्रों पर इस तरह डालते हैं कि जिससे उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। शुक्र ग्रह तुला राशि का स्वामी है जो कि आदर, प्रेम और भाई चारे के भावों को उत्पन्न व नियंत्रण करने के लिए जाना जाता है। तुला राशि का सुर्य और चंद्रमा के साथ ऐसे मिलान करना संयोग की बात हैै। 

इस त्योहार में गणेश पूजा और माता लक्ष्मी पूजा का बहुत प्रभुता है। कहा जाता है इस दिन माता लक्ष्मी अपने उल्लू पर सवार हो कर पूरी धरती की सैर करती है। इसी बीच अपने भक्तों पर दया दृष्टि डालते हुए जाती हैं। इस दिन लोग पुरानी बुरी बातों को भूल कर नए सिरे से शुरूआत करते है और एक दूसरे को मिठाईयां बांटते हैं। घरों से कूड़ा निकाल कर कमरों की सफाई की जाती है और नए वस्त्र डाले जाते हैं। दीपावली लोगों में नया उत्साह भर कर जाती है और परिवार के रिश्तों में मजबूती बना कर जाती है। हिंदू धर्म में दीपावली के त्योहार को प्रकाश की अंधकार, अच्छाई की बुराई, ज्ञान की अज्ञान और सत्य की असत्य पर जीत के रूप में जाना जाता है। हमें भी अपने अंदर सकारात्मक सोच रखकर इन त्योहारों से अच्छी बातें सीखनी चाहिए। दीपावली की पौराणिक कथाएं भी हमें सत्य के मार्ग पर चलने को प्रेरित करती है। 

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