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Amla Novmi 2022, Akshya Novmi 2022 | आवलाँ नवमी का महत्व,पूजा कैसे की जाती है,क्यों मनाई जाती है,

Amla Novmi
October 8, 2022

अक्षय नवमी 2022 – Akshya Novmi 2022

हिन्दू रीती रिवाज व पौराणिक कथाओ की मान्यता के अनुसार अक्षय नवमी को आवलाँ नवमी (Amla Novmi) के नाम से भी जानते है।आवलाँ नवमी के खास दिन आँवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। मनुष्य के उम्र भर स्वस्थ रहने के लिए ही। आँवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। इस साल 2022 में अक्षय नवमी (आवलाँ नवमी 2022) 2 नवंबर 2022 को मनाई जाएगी 

आवलाँ नवमी का महत्व – Amla  Novmi Ka Mahatva 

Anvla novmi –कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी की तिथि को आँवला नवमी मनाई जाती है। हिन्दू शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार इस दिन आँवले की और आँवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है की आंवले के वृक्ष में भगवान् श्री विष्णु और भगवान् शिव का वास माना जाता है। इस साल ये आँवला नवमी 2 नवंबर 2022 यानि बुधवार को मनाई जायेगी। 

आँवले की पूजा कैसे की जाती है – Amla Ki Pooja Kaise Ki Jati Hai

Amla Novmi – आवंला नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की जड़ में जल और कच्चा दूध चढ़ाया जाता है।  आंवले के वृक्ष ले तने के कच्चे सूत और मोली को लपेटते हुए 8 (आठ) बार परिक्रमा लगाई जाती है। इसके बाद पूजा करने बाद कथा कही जाती है ओर सुनी जाती है पूजन करने के बाद आंवले के वृक्ष के नीचे बैठ कर परिवार सहित भोजन करना बहुत शुभ और उत्तम माना जाता है। 

आंवला नवमी क्यों मनाई जाती है – Amla Novmi Kyo Manai Jati Hai 

amla vanami

Amla Novmi – कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन आंवला नवमी मनाई जाती है, इसे अक्षय नवमी के नाम भी जाना जाता है। वर्ष 2022 में यह त्योहार 2 नवंबर को यानि बुधवार को मनाया जा रहा है।Anvla novmi – इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण तथा अन्न आदि का दान भी किया जाता है। इससे अक्षय फल की प्राप्ति भी होती है।

Amla Novmi – पौराणिक कथाओ और मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान विष्णु और भगवान् शिव आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। इस आंवला नवमी के दिन आंवला के पेड़ की पूजा-अर्चना की जाती है

Amla Novmi – इस दिन दान पुण्य करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। अन्य दिनों की तुलना में नवमी पर किया जाने वाला दान-पुण्य कई गुना अधिक फल प्रदान करता है।  

Amla Novmi – आंवला नवमी के पावन  दिन परिवार के बड़े-बुजुर्ग और सभी सदस्य विधि-विधान से आंवला वृक्ष की पूजा-अर्चना करते है।  भक्तिभाव से और श्रद्धा से इस पर्व को मनाते हैं। ऐसा माना जाता है।Anvla novmi –  कि आंवला के पेड़ की पूजा करने के बाद 108 बार आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और हमारे घर में भगवान् विष्णु और भगवान् शिव की आशीर्वाद और कृपा सदैव बानी रहती है। पूजा-अर्चना करने के बाद खीर, पूड़ी, सब्जी और मिठाई आदि का भोग भी लगाया जाता है। कई भक्त जन तो आंवला पूजन के बाद आंवले के पेड़ की छांव में ब्राह्मण को स्वादिष्ट भोजन करवा कर उन्हें दक्षिणा भी देते है। 

Amla Novmi – आंवला नवमी के दिन घर की और आस पड़ोस की सभी महिलाएं भी अक्षत, पुष्प, चंदन आदि से पूजा-अर्चना कर पीला धागा या कच्चा सूत लपेट कर वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। धर्मशास्त्र के अनुसार इस दिन स्नान, दान, यात्रा ब्राह्मण को भोजन करवाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

आंवला नवमी पूजन से संबंधित कुछ बातें – 

  • आंवला नवमी के दिन प्रात:काल स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 
  • इसके बाद  आंवला वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और  ‘ॐ धात्र्ये नम:’ मंत्र से आंवले के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध की धार गिराते हुए पितरों का तर्पण करना चाहिए। 
  • इस दिन  कपूर व घी के दीपक जला कर आरती करें। 
  • फिर  पूजा-अर्चना के बाद पूड़ी , खीर , सब्जी और मिठाई  आदि का भोग लगाना चाहिए ।
  • आंवला के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा लगाएं। 
  •  आंवले के वृक्ष के नीचे ब्राह्मणों को स्वादिष्ट भोजन कराएं तथा यथा शक्ति दक्षिणा भी दें । खुद भी अपने परिवार सहित उसी आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करें।
  • आंवला नवमी के पावन दिन आंवले का वृक्ष घर में लाकर लगाना वास्तु की दृष्टि से शुभ और उत्तम भी माना जाता है। अपने घर के पूर्व दिशा में ही आंवले का वृक्ष को लगाना चाहिए। ऐसा करने से घर में  सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह वृक्ष घर की उत्तर दिशा में भी लगाया जा सकता है। 
  • आंवला नवमी के दिन  पितरों की शांति  निवारण के लिए ऊनी वस्त्र व कंबल दान करें ।
  • अक्षय नवमी को धात्री और कूष्मांडा नवमी के नाम से भी जाना जाता है ।
  • जिन बच्चों की स्मरण शक्ति कमजोर है  तथा पढ़ाई में मन न लगता है।  उनकी पुस्तकों में आंवले और इमली की हरी पत्तियों को रखने से उनकी स्मरण शक्ति तीव्र भी होती है। 

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